अपराध के सिद्धांत - Principles of Crime
अपराध के सिद्धांत - Principles of Crime
आज के समय में अपराधशास्त्र ने एक बृहत विषय के रूप में विस्तार प्राप्त कर लिया है। इसके लिए विभिन्न विद्वानों द्वारा दिए गए सिद्धांतों का आधार इसमें लिया गया है। अपराधशास्त्र में मूलतः अपराध का अध्ययन किया जाता है। इसलिए हमें यह जरूरी है कि हम पहले अपराध को समझे। अपराध को समझने के लिए विभिन्न विद्वानों के सिद्धांतों एवं उनके संप्रदायों को देखना भी अनिवार्य बन जाता है। यहाँ हम इन पर संक्षेप में बात करेंगे।
अपराध के कारण और कारकों का विश्लेषण कर विभिन्न विद्वानों ने अपराधशास्त्र मेन अपराध के सिद्धांत दिए हैं। सदरलैंड ने इन सिद्धांतों को एकत्रित करने की कोशिश की है जो निमन्वत है।
इसके बावजूद विभिन्न विद्वानों का संबंध इन सिद्धांतों से रहा है। इनमें से कुछ इस प्रकार है। जैसे
शास्त्रीय सिद्धांत बेकेरिया, बेथम तथा फ्यूरबैका
भौगोलिक सिद्धांत- क्वेटलेट एवं ग्वेरी माटेस्क्यू तथा लोम्ब्रोसो। मैत्री पारिस्थितिकीय सिद्धांत- टार्वे, बेटग्लिया, लकेसन आदि।
समाजवादी सिद्धांत मार्क्स एवं एंगेल्स बोंगर आदि।
मानसिक परीक्षण वाला सिद्धांत फेरी गौडर्ड।
मनोविश्लेषण सिद्धांत फ्रायड, एडलर तथा ऑटोरेंक आदि।
बहुकारकीय सिद्धांत ओगबर्न, रेकलस आदि। इन सिद्धांतों में अपराध के कारकों के आधार पर अपराध को समझने की कोशिश की गई है, जैसे शास्त्रीय सिद्धांत में सुखवादी दर्शन के आधार पर यह बताया गया है कि मुखदुख के कारण अपराध घटित होते हैं। भौगोलिक संप्रदाय का मानना है कि अपराध का संबंध संस्कृति और जनसंख्या की बनावट से हैं। परिस्थितिशास्त्रीय सिद्धांतकार अपराध को परिस्थिति संबंधित दशाओं का निर्माण मानते हैं।
समाजवादी संप्रदाय से जुड़े विद्वान आर्थिक निर्धारणवाद को अपराध का मुख्य स्रोत मानते हैं। मानसिक परीक्षण का आधार लेने वाले सिद्धांतकार मानसिक दुर्बलता को अपराध का महत्वपूर्ण कारकमानते हैं। मनोविश्लेषण से संबंध रखने वाले मनोवैज्ञानिक अपराध को मनोव्याधि के रूप में परिभाषित करते हैं। इसके बावजूद कुछ सिद्धांतकार अपराध को एक कारकीय के बजाय बहुकारकीय के रूप में परिभाषित करना पसंद करते हैं। इसलिए इनके सिद्धांत को बहुकारकीय सिद्धांत के रूप में जाना जाता है।
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