मनोचिकित्सकीय सामाज कार्य - Psychiatric Social Work
मनोचिकित्सकीय सामाज कार्य - Psychiatric Social Work
समाज कार्य के विद्वानों का मानना है कि मनोचिकित्सकीय समाज कार्य वह समाज कार्य है जिसका संबंध मनोरोग विज्ञान से है तथा यह समाज कार्य मनोरोग विज्ञान के साथ ही व्यवहार में आता है। समाज कार्य के इतिहासकारों के अनुसार 1920 के बाद फ्रायडियन मनोविश्लेषण की संकल्पना के कारण चिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता और मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता का अलग-अलग रूप में विभाजन हुआ। चिकित्सकीय समाज कार्य का विधिवत रूप से प्रशिक्षण स्मिथ कॉलेज (Smith College) में 1918 से शुरू हुआ।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर इडा कानोन lda Cannon) एवं रिचर्ड कोबोट के बीच में संघर्ष भी पाया जाता है जिसमें कानोन का कहना था कि सामाजिक कार्यकर्ताओं को हेल्थ केयर में डायरेक्ट ट्रीटमेंट की भूमिका होनी चाहिए जैसे रोगी के बेहतर उपचार के लिए उसके आस-पड़ोस में से अवरोधों को हटाना। परंतु फोबोट का कहना था कि सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका एक पूल की तरह है जैसे अस्पताल और रोगी के बीच में संपर्क स्थापित करना।
भारत जैसे विकासशील देशों में इस संदर्भ में बाते बड़े कमजोर रूप में हुई है। मुंबई के सर दोराबजी टाटा ग्रेज्युएट स्कूल ऑफ सोशल वर्क में 1937 में बाल निर्देशन क्लीनिक के अंतर्गत मनोचिकित्सकीय कार्यकर्ता के कार्य की शुरुआत हुई। समाज कार्य के इतिहासकारों के अनुसार जी आर बॅनर्जी को इसके संस्थापक के रूप से नामित किया जाता है इन्हीं के मार्गदर्शन में भारत में मानोचिकित्सकीय सामाजिक कार्य का प्रशिक्षण शुरू हुआ।
मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता को परिभाषित करते हुए कॉलिन्स डिक्शनरी ने लिखा है (ब्रिटेन के संदर्भ में)कि एक योग्य व्यक्ति, जो मानसिक रूप से बीमार लोगों एवं उनके परिवार को मनोचिकित्सकीय अस्पताल, बाल निर्देशन क्लीनिक या समाज सेवा विभाग क्षेत्र की टीम के साथ काम करता हो और हो सकता है कि वह एक अनुमोदित कार्यकर्ता हो (Harper, 2000) सत्यप्रकाश गुम (2013) के अनुसार मनोचिकित्सकीय समाज कार्य समाज कार्य की वह विशिष्ट शाखा है, जो अपने विशिष्ट ज्ञान तथा नैपुण्य द्वारा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उन संस्थाओं में व्यवहार में आता है।
जिन संस्थाओं का प्रमुख लक्ष्य मानसिक रोगों का अध्ययनउनका उपचार तथा उनकी रोकथाम करना
प्रो. राजाराम शास्त्री (2015) अपनी किताब समाज कार्य में मनोचिकित्सकीय समाज कार्य को परिभाषित करते हुए लिखते हैं, 'मानसिक अथवा आवेगात्मक संतुलन की स्थिति के व्यक्तियों के साथ किए जाने वाले प्राय: वैयक्तिक कार्य तथा कभी-कभी सामूहिक कार्य ही मनोचिकित्सकीय समाज कार्य है। यह कार्य स्वयं कार्यकर्ता भी कर सकता है और मानसिक या आवेगात्मक रोगों से ग्रसित व्यक्ति के उपचार में लगे मनोचिकित्सकों के साथ सहयोग करके भी।"
समाज कार्य से संबंधित ज्यादातर लोगों ने मनोचिकित्सकीय समाज कार्य को वैयक्तिक समाज कार्य तक सीमित करके देखा है बावजूद इसके बैनर्जी जैसे भारतीय विद्वानों का मानना है कि मनोचिकित्सकीय समाज कार्य का वास्तविक अर्थ समाज कार्य व्यवहार से लगाया जाना चाहिए न कि केवल वैयक्तिक समाज कार्य, जिन्हें पश्चिमी पुस्तकों में लिखा गया है। इस तरह के विचारों के उपरांत मनोचिकित्सकीय समाज कार्य व्यवहार में काफी परिवर्तन आया और आज उसमें वैयक्तिक समाज कार्य की चौखट से चाहर जाकर देखा जाने लगा है।
इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO) द्वारा यह सलाह दी जा रही है कि 2020-2030 तक मानसिक स्वास्थ्य समस्या (Mental ill helth) जिसको दबाव (Depression) के पदावली में रखा गया है, इसमें लगातार वृद्धि होती जा रही है जिसके कारण इसे उच्च कोटि की बीमारीयों के श्रेणी में विभाजित किया जा रहा है और यह दावा किया जा रहा है कि पब्लिक हेल्थ का दृष्टिकोण ही इसके लिए उपयुक्त जिम्मेदारी ले सकता है। ऐसे में मनोचिकित्सकीय समाज कार्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने विधियों के अंतर्गत लोगों को इन समस्याओं से मुक्त करने में सहयोग प्रदान करें।
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