सामाजिक कार्यकर्ता का मनोचिकित्सकीय सेवाएं - Psychotherapeutic Services of Social Worker
सामाजिक कार्यकर्ता का मनोचिकित्सकीय सेवाएं - Psychotherapeutic Services of Social Worker
वैयक्तिक समाज कार्य तथा समूह कार्य के बावजूद अन्य विधियों को उपयोग में लाकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोचिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करता है, जिसमें प्रमुख है।
1. सामुदायिक स्वास्थ्य,
2. स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रम, परिवार कल्याणंति
3. वैवाहिक समायोजन
4. कपल थैरेपी (Couple Therapy)
सामाजिक कार्यकर्ता इसका उपयोग समाज एवं समस्या की माँग के अनुरूप करता है। सामुदायिक स्वास्थ्य के अंतर्गत समाजिक कार्यकर्ता समुदाय आधारित सेवाओं के प्रदाता के रूप में कार्यत होता है। जैसे कि बताया जा रहा है, बिना मानसिक स्वास्थ्य के पूर्ण स्वास्थ्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। विश्व में लगातार मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है उन सब को वैयक्तिक या समूह कार्य के अंतर्गत सेवाएँ प्रदान करने के लिए कर्मियों की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य के प्राप्ति के लिए चलाए जाने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन क्रियान्वयन की जिम्मेदारी का बहन भी मनोचिकित्सकीय कार्यकर्ता को करना है। परिवार एक बुनियादी इकाई है इसके संवर्धन के लिए और उसे मजबूत बनाने के लिए परामर्शन के अंतर्गत कार्य किया जा सकता है। हाल में भारत के विभिन्न समाजों में भी वैवाहिक कुसमायोजन की समस्या बढ़ती जा रही है तथा वैवाहिक जीवन में कई सारी समस्याएँ उत्पन्न हो रही है। ऐसे में उनके मनोसामाजिक स्वास्थ्य को बेहतरी प्रदान करने का जिम्मा समाज कार्य अपने ऊपर लेता है। मानसिक स्वास्थ्य और पीड़ित व्यक्तियों का इलाज, जैसे- विशेष क्षेत्र में मनोचिकित्सकीय सामाजिक कार्यकर्ता संकट परामर्श समूह चिकित्सा कौशल शिक्षा और मनो सामाजिक (psycho-social) पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करता है।
भारतीय संदर्भ में चिकित्सकीय समाज कार्य को काफी बेहतरी से उपयोग में लाया जा रहा है। फलस्वरूप अस्पतालों में चिकित्सकीय समाज कार्यकर्ता दिखाई देने लगे हैं। वे अपनी भूमिकाओं का बखूची बहन भी कर रहें हैं। किंतु मनोचिकित्सकीय समाज कार्य की स्थिति बड़ी कमज़ोर नजर आती है। भारतमें कुल 42 मनोचिकित्सालय हैं, जहां मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। निमह स (National Institute of Mental Health and Neuro Sciences) जैसे कुछ एक संस्थानों को छोड़ के सभी अस्पतालों की स्थिति यह है कि आज भी यहाँ मनोचिकित्सकीय कार्यकर्ता की नियुक्ति नहीं हैऔर जिस-जिस जगह पर इनकी नियुक्ति हुई है वहाँ उनके कार्य का स्वरूप भिन्नभिन्न नजर आता है। पश्चिमी अवधारणा के अनुसार स्थिति प्राप्त करने के लगातार प्रयास निमहंस द्वारा जारी है। किंतु सरकारी तौर पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत कमजोर दिखती है। स्वतंत्रता के बाद मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 के आगे हम नहीं बढ़ सके हैं।
"ग्यारहवी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत यह बात कही गई है कि प्रति वर्ष भारत में लगभग ३२० मनोचिकित्सक ५० क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, २५ सामाजिक मनोचिकित्सक कार्यकर्ता एवं १८५ मनोचिकित्सक नर्म को प्रशिक्षित किया जाएगा (MURTHY, 2011) अभी वर्तमान में मानसिक स्वास्थ्य नीति को बनाया गया है, जिसका कार्यान्वयन अभी बाकी है। गिने-चुने प्रशिक्षण केंद्रों के अंतर्गत मनोचिकित्सकीय समाज कार्य का प्रशिक्षण मिलता है जिसमें भी विभिन्नता है। कुल मिलाकर मनोचिकित्सकीय समाजकार्य समाज कार्य के अन्य क्षेत्रों की तरह अपनी जगह भारतीय धरातल पर नहीं बना पाया है। इसके कारणों को खोज कर इसमें सुधार की गुंजाइश बनी हुई है।
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