विशेष योग्यजनों के पुनर्वास कार्यक्रम - Rehabilitation Program for Persons with Disabilities
विशेष योग्यजनों के पुनर्वास कार्यक्रम - Rehabilitation Program for Persons with Disabilities
सरकारी क्षेत्र में पुनर्वास सेवाओं का इतिहास अर्वाचीन है। ऐतिहासिक रूप में विशेष योग्यजनों को सेवा प्रदान करने का कार्य पहले स्वयंसेवी क्षेत्र तक सीमित था। समाज कल्याण सेवा विशेषतया चिकित्सा एवं पुनर्वास के क्षेत्रों में सहायता अधिकतर मिशिनरी कार्यकर्ता द्वारा ही दी जाती थी, जो सामाजिक एवं आर्थिक विकास के सामान्य प्रोग्रामों का एक अंग था।
परिणाम स्वरूप अशासकीय क्षेत्रों में अनेक समितियों की स्थापना हुई, जो रोगी, अशक्त, निराश्रित एवं विशेष योग्यता वाले व्यक्तियों की देखभाल करती थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सरकार विशेष योग्यता को रोकने, पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करने, क्षेत्रीय परीक्षणों द्वारा सेवाओं को बेहतर बनाने सामाजिक एवं आर्थिक उपायों तथा विकास के लाभों को जनसंख्या तक पहुंचाने के लिए कार्यकारी आदेशों एवं अधिनियमों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
विशेष योग्यजन के पुनर्वास हेतु चलाए जा रहे प्रमुख कार्यक्रम निम्नलिखित है.
निर्योग्यताओं की रोकथाम भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्याम्यताओं की रोकथाम के लिए पोलियो, डी. पी. टी., टिटनेस के विरुद्ध टीकाकरण जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। साथ ही नेत्रहीनता की रोकथाम एवं नियंत्रण कुपोषण के निवारण हेतु कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में माताओं को जागृत एवं शिक्षित करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
स्वयंसेवी संगठनों की सहायता एवं अनुदान उपलब्ध कराना सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय की ओर से आवर्ती एवं अनावर्ती खर्च के लिए स्वयंसेवी संगठन के बजट के90 प्रतिशत अंश तक अनुदान राशि प्रदान की जाती है। सहायता प्राप्त स्वयंसेवी संगठनों से आशा की जाती है किाo प्रतिशत धनराशि स्वयं अपने संसाधनों से जुटाकर विशेष योग्यता को रोकने विशेष शिक्षा देणे एवं कुशलता सिखाने प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने, शारीरिक एवं व्यवसायिक चिकित्सा प्रदान कराने में सहायक सिद्ध हो।
विशेष योग्यजनों के लिए छात्रवृत्तियां केंद्रीय सरकार की शारीरिक रूप से विशेष योग्यता वाले विद्यार्थी एवं शोधार्थियों को छात्रवृत्तियां देने की योजना है। इस योजना का उद्देश्य विशेष योग्यजनों को आर्थिक रूप से सहायता करना है, जिससे वे अध्ययन कर सके और अपना जीवन स्तर ऊंचा उठा सके। राष्ट्रीय विशेष योग्यता संस्थानों की स्थापना: सात राष्ट्रीय संस्थान है जो मानव बल के विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं ये निम्नलिखित हैं:
1. शारीरिक विकलांग संस्थान नई दिल्ली
2. राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान (1950) देहरादू ना
3. राष्ट्रीय ऑर्थोपेडिक विकलांग संस्थान (1978) कोलकाता।
4. राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान (1964) सिकंदराबादा
5. राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान (1983) मुंबई
6. राष्ट्रीय पुनर्वास तथा अनुसंधान संस्थान (1975) कटका
7. राष्ट्रीय बहु-विकलांग सशक्तीकरण संस्थान (2005) चेन्नई।
इसके साथ ही पांच संयुक्त पुनर्वास केंद्रचार पुनर्वास केंद्र तथा 120 विकलांग पुनर्वास केंद्र है जो लोगों को विभिन्न प्रकार की पुनर्वास सेवाएं प्रदान करते हैं। ति इन राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण हेतु अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन प्रोग्रामों डिप्लोमा पाठ्यक्रम जैसे आवश्यक प्रशिक्षण एवं ज्ञानवर्धक कोर्स प्रदान करते हैं। विशेष योग्यजनों के पुनर्वास से संबंधित सभी पक्षोंपर अनुसंधान प्रायोजित एवं आयोजित करते हैं। इस क्रम में अन्य कार्य: कम लागत वाले सहायकों एवं यंत्रों को डिजाइन करना सुधारात्मक उपचार विधियाँ विशेष योग्यजनों के समस्याओं का पता लगाना, बेल का विकास, जनता के जागरूकता प्रसार हेतु सामग्री तैयार करना पुरुषों एवं महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण संकट हस्तक्षेप सेवाएं परामर्शीय सेवाएँ आदि। विशेष योग्यजनों के पुनवांस संबंधी विभिन्न पंचवार्षिक योजनाओं में किए गए प्रयास निम्नलिखित है:
नेत्रहीन और बधिर बच्चों के लिए आदर्श विद्यालयों की स्थापना की गई।
● विशेष योग्यजनों के लिए उनके घरों पर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना का संचालन किया गया।
• वयस्क नेत्रहीनों के लिए स्थापित प्रशिक्षण विद्यालयों में महिलाओं के लिए अनुभाग स्थापित किया गया।
● बच्चों में नेत्रहीनता को रोकने के उद्देश्य से विटामिन-ए के वितरण को सुनिश्चित किया गया।
● विशेष योग्यजनों के लिए छात्रवृत्तियां उपलब्ध की गई।
● उनके घरों व पड़ोस में कार्य उपलब्ध कराया गया।
• लाइब्रेरी, प्रशिक्षण केंद्र, आदर्श विद्यालय, ब्रेल प्रेम आदि की सुविधा।
रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध करने में सहायता प्रदान करना।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विशेष योग्यजनों तक सेवाएँ पहुंचाने की व्यवस्था।
• इलाज के लिए टिकाकरण कार्यक्रम तथा बीमा योजना एवं दुर्घटना बचाव के की व्यवस्था ।
इनके लिए मनोरंजन की व्यवस्था की गई। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम:
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