समाज कार्य और अपराधी सुधार सेवाएँ - Social Work and Criminal Correction Services
समाज कार्य और अपराधी सुधार सेवाएँ - Social Work and Criminal Correction Services
अपराधशास्त्र के बदलते स्वरूप में अपराध के निरोध, नियंत्रण एवं उनके पुनर्वास के लिए केवल दंड ही काफ़ी नहीं है इसके अलावा उन्हें उपचार और सुधार की आवश्यकता होती है। भारत में अपराध की • स्थितियों को देखकर लगता है कि इन पर कोई कारगर उपाय नहीं किए जा रहे हैं।NCRB के 2014 के आंकड़ों पर नजर डाले तो इसमें लगातार वृद्धि दिखाई दे रही है। वयस्क अपराध के साथसाथ बाल अपराध की स्थिति भी बिगड़ती हुई नजर आती हैं। ऐसे में अपराध निरोध हेतु समाज में लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास जरूरी है। समाज कार्य के अंतर्गत वैयक्तिक सेवा प्रणाली के अंतर्गत अपराधी को एक व्यक्ति के रूप में समाज में समायोजन की वकालत करता है ऐसे में एक वैयक्तिक सामाजिक कार्यकर्ता की यह जिम्मेदारी है कि वह अपराधियों के उपचार एवं पुनर्वास हेतु कार्यक्रम तैयार करे और व्यक्तिगत स्तर पर उसे मदद मुहैया करें।
भारत में अपराधियों की बढ़ती संख्या को नजर में रखते हुए प्रत्येक अपराधी को व्यक्तिगत तौर पर सेवा दिलाना असंभव लगता है। समाज कार्य से जुड़े विद्वानों का मानना है कि ऐसे समाज कार्य समूह या समुदाय आधारित सेवाओं का सहारा ले सकता है। इसी कारण आज जेलों में भी समुदाय आधारित सुधार पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा है। अपराधियों के मानवीय अधिकारों की सुरक्षा हेतु वकालत आदि कार्य समाज कार्य के अंतर्गत किए जाने लगे। संस्थागत ढाँचे में अपराधियों के पुनर्वास के लिए उनको शिक्षण, प्रशिक्षण आदि की आवश्यकता को महसूस किया जाने लगा फलस्वरूप आज के जेलों में हम व्यावसायिक प्रशिक्षणों को देख सकते हैं। विभिन्न संस्थाओं (रिमांड होम्, परिवीक्षा गृह, सुधार स्कूल, सामान्य जेल, खुले जेल में सामाजिक कार्यकर्ता अधीक्षक के रूप में सेवारत हैं। इन संस्थागत क्रियाकलापों के बावजूद उनके अनुरक्षण सामाजिक सुरक्षा मानवीय अधिकार तथा पुनर्वास को लेकर बकालत करने का कार्य भी समाज कार्य ने बखूबी किया है। अपराध के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ताओं के अपराधशाख से संबंधित ज्ञान आवश्यक है इसमें से कुछ निम्नवत है
1. विचलित व्यवहार का ज्ञान
2. अपराध के कारणों का ज्ञान
3. अपराध निरोध के तरीकों का ज्ञान
4. अपराधी प्रवृत्तियों का ज्ञान
5. समाज विरोधी व्यवहार का ज्ञान
6. अपराधी के मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक पृष्ठभूमि का ज्ञान।
उक्त ज्ञान का उपयोग कर सामाजिक कार्यकर्ता अपराधियों के निरोध उपचार तथा पुनर्वास का कार्य बेहतरी से करता है।
अपराधशास्त्र किसी खास विषय के विशेषज्ञ का क्षेत्र नहीं रहा है इसलिए कुछ विद्वान ऐसा भी कहते है कि अपराधशास्त्री ऐसा राजा होता है जिसका कोई साम्राज्य नहीं हैं। ऐसे में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ आपसी सहमति से अपराधियों के उपचार विकास और पुनर्वास के लिए कार्य करते हुए देखे जा सकते हैं। समाज की प्रत्येक चिता पर सोचना और उसके लिए बेहतर उपायों को ढूँढ़ने का कार्य समाज कार्य में लगातार होता है। अपराध और अपराधी की समस्या भी कुछ ऐसी ही समस्या है, जिसके प्रति समाज कार्य बहुत पहले से चिंतित दिखता है। किंतु भारतीय परिदृश्य में जेलों के प्रायोगिक सुधार अधिनियम बनाना आदि संस्थागत कार्यों, जो केवल राज्य के अंतर्गत आते हैं इनके अलावा अपराधियों के लिए स्वैच्छिक सेवाओं का दायरा अभी भी खाली दिखता है। इसका यह भी एक कारण हो सकता है कि अपराध जैसा मामला ज्यादातर कानून या राज्य से संबंधित माना जाता है।
ऐसे में नागरिक समूहों के लिए जगह कम ही बचती है। हाल-फिलहाल में जेलों में भी मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति की जा रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अपराधी सुधार प्रशासन के अंतर्गत इन सुधार संस्थाओं में काफी पहले से सेवा प्रदान कर रहें हैं किंतु वे भी एकदम कानूनी तौर पर लगती है। ऐसा लगता है जेल के प्रशासन ने ही उनको बदल दिया। बहरहाल बाकी विकसित देशों की तुलना में आज भी भारत में अपराधियों को बहुत ही तीन नजर से देखा जाता है। यही कारण है कि जो एक बार अपराधी बन जाता है वह फिर से समाज में समायोजित नहीं हो। पाता, क्योंकि वह समाज उसको इसकी अनुमति नहीं देता। ऐसे में अपराधियों के प्रति सामान्य समाज के मन में, जो प्रतिमा हैं, उसको ठीक करना समाज कार्य का प्रथम दायित्व है। क्योंकि अपराध को केवल कानूनी रूप में देखना उनके सुधार को गलत दिशा प्रदान कर सकता है इसलिए यह होना चाहिए कि अपराधी को सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखना होगा और यह कार्य समाज कार्य के अंतर्गत बखूबी किया जाता है। इसलिए अपराध के क्षेत्र में सामाजिक कार्य अपनी भूमिका बेहतरी से निभा सकता हैं।।
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