समाज कार्य एवं तृतीय पंथी जन - Social Work and Third Gender People

समाज कार्य एवं तृतीय पंथी जन - Social Work and Third Gender People

समाज कार्य का जो वर्तमान स्वरूप हमारे सामने है, वह मुख्य रूप से 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुई. सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तनों का परिणाम है। इससे पहले भी समाज सेवा के रूप में व्यक्तियों द्वारा निर्धन, असहाय व्यक्तियों की सहायता की जाती रही है। ज्यादातर विद्वान इस बात पर एक मत है कि समाज कार्य का व्यवसायिक स्वरूप प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उभरकर आया। यह वह समय था के जब एक तरफ बुद्ध के बाद की भयावह स्थिति थी तो दूसरी तरफ औद्योगिकरण के परिणाम स्वरूप विभिन्न सामाजिक परिवर्तन भी हो रहे थे, जिसका सकारात्मक के साथ नकारात्मक प्रभाव भी समाज पर पड़ रहा था, जो सामाजिक समस्याओं के रूप में था। इन समस्याओं से संगठित रूप से निपटने के लिए। सहानुभूति रखने वाले और प्रशिक्षित व्यक्तियों की आवश्यकता महसूस हुई।


समाज कार्य अपने स्वरूप में वैज्ञानिक ज्ञान और प्रशिक्षण पर आधारित है, जो समस्याग्रस्त व्यक्ति में समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में सहायता प्रदान करता है ताकि भविष्य में आने वाली विभिन्न समस्याओं का निराकरण उस व्यक्ति द्वारा किया जा सके और बेहतर जीवन स्तर प्राप्त कर सके। इसकी यही विशेषता इस समाज सेवा तथा समाज सुधार से अलग करती है।


पिछले दशकों में समाज कार्य के क्षेत्र में परिवर्तन आया है। इस दिशा में परिवर्तन का कारण कल्याणकारी राज्य की बढ़ती भूमिका को माना जा सकता है। समाज कार्य की दृष्टि से कल्याणकारी राज्य को सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इसका प्रमुख उद्देश्य ही कल्याण की भावना से प्रेरित होकर जनता के लिए कार्य करना है। चूंकि आधुनिक राज्यों को और भी बहुत से कार्य करने होते हैं ऐसे में वह इन कल्याण कार्यों के निष्पादन के लिए गैर-सरकारी संगठनों व स्वयं सेवी संगठनों की सहायतालेता है। इसके लिए राज्य इन संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। कुछ स्वयं सेवी एवं गैरसरकारी संगठन ऐसे भी है जो बिना वित्तीय सहायता लिए अपने संसाधनों से इन कार्यों का निष्पादन करते हैं।


योजना आयोग, भारत सरकार द्वारा समाज कार्य के क्षेत्र को वर्गीकृत किया गया है, जो इस प्रकार परिवार कल्याण, बाल कल्याण, युवक कल्याण महिला कल्याण, विकलांगों के लिए सेवाएं, सामुदायिक कल्याण सेवाएँ, चिकित्सकीय समाज कार्य, मनोसामाजिक तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान हेतु सेवाएँ असमायोजित व्यक्तियों के लिए सेवाएँ और व्यक्तियों के समायोजन से संबंधित सेवाएं इत्यादि।


तृतीय पंथी समुदाय समाज का सबसे वंचित वर्ग माना जाता है। उनके विकास के लिए तथा समाज में समायोजन के लिए समाज कार्य अपने प्रविधियों के माध्यम से सहायता कर के आत्मसम्मानपूर्ण आत्मनिर्भर, जीवनयापन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।