शहरी विकास कार्यक्रम - Urban Development Program

शहरी विकास कार्यक्रम - Urban Development Program


नगरीय सामुदायिक विकास कार्यक्रमः


नगरीय सामुदायिक विकास का निर्माण नगरीय समस्याओं के समाधान की एक संभावित विधि के रूप में हुआ था, जिसका आधार लोगों की समस्याओं का समाधान स्वयं उनके प्रयासों तथा भागीदारी से किया जाना था, जिसमें नगरीय नियोजन तथा विकास के लिए जनसंख्या नीति क्षेत्रीय विकास, सत्ता का विकेंद्रीकरण जैसी कई विधियों को स्थान दिया गया। नगरीय सामुदायिक विकास के अंतर्गत नगरीय जीवन के संदर्भ में प्रभावशाली सामुदायिक भावना का विकास तथा दूसरी सामुदायिक एकता और परिवर्तन के लिए स्वयं सहायता तथा नागरिक भागीदारी की अवधारणा पर निर्भर था। भारतवर्ष में नगरीय सामुदायिक विकास की पहली योजना फोर्ट फाउंडेशन की सहायता से वर्ष 1958 में दिल्ली शहर में प्रारंभ की गई थी. इसके बाद अहमदाबाद 1962, बड़ौदा 1965, कोलकाता 1966 में भी ऐसी प्रारंभिक परियोजनाएं शुरू की गई।

नगरीय सामुदायिक विकास की इस केंद्रीय योजना में कार्यक्रम के नियोजन से लेकर क्रियान्वयन तक के सभी स्तरों पर लोगों की भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया था, ताकि लोग अपनी जरूरतो तथा समस्याओं के अनुसार कार्यक्रम बना सके। इन परियोजनाओं में उस क्षेत्र की आवश्यकताओं तथा दशाओं को ध्यान में रखते हुए ही कार्यक्रम को चलाए जाने की बात की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि प्रयासों को कुछ उन्हीं कार्यक्रमों पर केंद्रित किया जाए, जिनका प्रभाव ज्यादा हो तो अधिक उपयुक्त होगा। योजना में विभिन्न गतिविधियों कार्यक्रमों को छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो निम्नवत है,


1) भौतिक सुधार तथा नागरिक सुविधाएं


2) स्वास्थ्य एवं सफाई


3) शैक्षिक कार्यक्रम


4) सामाजिक, सांस्कृतिक तथा मनोरंजनात्मक कार्यक्रम


5) आर्थिक कार्यक्रम


6) मिश्रित विविध कार्यक्रम