नेत्रहीन - Visually Impaired

नेत्रहीन -  Visually Impaired

नेत्रहीनता का सामान्य अर्थ दृष्टि के पूर्ण आभाव से है। जन्म से नेत्रहीन और कुछ अन्य प्रकार के जैसे युद्ध मारपीट, मस्तिष्क जोर, सिर में चोट, मानसिक अपघात, लकवा आदि कारणों से दृष्टिविहीन रोगियों को नेत्रहीनों की परिभाषा में सम्मिलित किया जाता है। नेत्रहीनों की समस्याः नेत्रहीन का जीवन बड़ा ही कष्टदायी होता है। प्राचीन काल में तो नेत्रहीनों के उपर है। प्राचीन काल में त कभी ध्यान नहीं दिया जाता था।

उसे बिना किसी देखभाल के छोड़ दिया जाता था और वह भिक्षा मांग कर अपनी जीविका चलाता था। ऐसे बच्चे जो जन्म से अंधे होते थे फेक दिए जाते या मार दिए जाते थे। दुनिया के किसी भी भाग में अंधे को रखना अच्छा नहीं समझा जाता था। नेता के कारण नेत्रहीनता मूलतः एक चिकित्सकीय समस्या समझी जाती है परंतु भारतीय संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि इसके कारणों की दृष्टि से भारतीय जनसंख्या की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण है जो निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट है. 


i. संक्रमण रोगों के दौरान असावधानी के कारण रोगी दृष्टिहीन हो जाते है। रक्त का विकार भी दृष्टिहीनता के कारण बन जाता है। बालकों की नेत्रहीनता अधिकतर कुपोषण के कारण होती है। आर्थिक और सामजिक कारक मुख्य रूप से भारतीय ग्रामीण जनसंख्या के अंसतोषजनक और असंतुलित आहार के लिए उत्तरदायी है। मोतियाबिंद एक ऐसी आंख की बीमारी है जो उपचार योग्य है, परंतु अज्ञानता के कारण लोग समय पर इलाज नहीं करते और नेत्रहीनता के शिकार होते


ii. मारपीट व दुर्घटना व्यक्ति को दृष्टिहीन बना देती है। बालक के जन्म के समय एक साधारण चोट भी


नेत्रहीनता का कारण बन सकती हैं। औद्योगीकरण के साथ-साथ औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारण से उत्पन्न होने वाली अयोग्यताएं और अक्षमताएं भी बढ़ती जा रही है। इसे भी नेत्रहीनता का कारण माना जा सकता है। 


iil परिवार में किसी भी व्यक्ति की अंधता संतानादि पर अपना प्रभाव छोड़ती है। परिणाम स्वरूप बालक वंशानुगत नेत्ररूप से विशेष नेत्रविहीन योग्यजनबन जाता है।


iv. साधारण रोग आंखों का रोग या शरीर के अन्य किसी रोग के कारण भी दृष्टिहीनता संभव है।


परिवेश जन कारकों एवं धुल घुआ और धूप भी आँखो के रोग और दृष्टिहीनता का कारण बन सकती है। 


v. विषैले पदार्थों का प्रयोग, विष या मादक द्रव्यों के सेवन से भी व्यक्ति सकता है।


निराकरण के उपाय, नेत्रहीनों की समस्या के निराकरण के लिए सर्वप्रथम का बढ़ाने कारणों को दूर करना उचित होगा। तत्पश्चात नेत्रहीनों के लिए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि उन्हें अंधा होने के कारण उन्हें किन्ही कठिनाईयों का सामना न करना पड़े। नेत्रहीनों को शिक्षा देकर इस योग्य बना दिया जाए कि वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके तथा उन्नस्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। वे अपनी रोजी स्वयं कमा सके तथा उन्हें किसी पर आश्रित रह कर जीवनयापन न करना पड़े। शिक्षा और अभ्यास से एक नेत्रहीन भी उतना ही कारगर हो सकता है, जितना कि सामान्यरूप से देख जाने वाला व्यक्ति हमारे देश में नेत्रहीनों की स्थिति दयनीय है।

उन्हें गली गली भटक कर भिक्षा मांग कर जीवनयापन करना पड़ता है। अतएव आवश्यकता इस बात की है कि जगह-जगह नेत्रहीनों के लिए स्कूल खोले जाएं, जहां उन्हें समुचित शिक्षा देकर ऐसा बना दिया जाए कि वे भिक्षावृत्ति को छोड़कर अन्य उत्पादकों में अपना हाथ बंटा सके।