अहिंसा - अर्थ एवं परिभाषा - Ahimsa (Nonviolence) - Meaning and Definition
अहिंसा - अर्थ एवं परिभाषा - Ahimsa (Nonviolence) - Meaning and Definition
गांधी का जीवन सिद्धांत एवं व्यवहार का पूर्ण समन्वय था। गांधी जी कहते है कि यदि हम निर्मन प्रतियोगिता को समाप्त अहिंसाके सिद्धांत को सिद्ध कर सके तो इसे संसार की उसकी कायापलट के सर्वोत्तम साधन के करने और धनलोलुपता तथा लालच से उत्पन्न होनेवाले सामाजिक विघटन को रोकने रूप में पेश कर सकते हैं। गांधी के इन बातों से पता चलता है कि अहिंसा उनके लिए दुनिया बदलने की सर्वोतम साधन थी। वे यह भी कहा करते थे कि मेरे जीवन का मार्गदर्शन सिद्धांत निष्क्रियता नहीं, अपितु अधिकतम सक्रियता है। अतः कहना उचित है कि गांधीजी सिद्धांतों की कोरी कल्पना के बजाय व्यवहारिकता के धरातल पर रहना पसंद करते थे।
अहिंसा का सामान्य अर्थ किसी दूसरे व्यक्ति अथवा जीव को कष्ट न पहुंचाने की भावना एवं क्रिया है। गांधी जी के दृष्टि में मन, वचन एवं कर्म से दूसरे को कष्ट न पहुंचाना ही अहिंसा है। गांधी अहिंसा को ईश्वर तक पहुंचने की बात करते थे। जैन धर्म की सबसे बड़ी बात यह है कि उसमें सबसे ज्यादा बल अहिंसा पर दिया गया है। बौद्ध धर्म भी विश्व शांति की बात इसी अहिंसा पर करता है। इस तरह हिंसा का आभार ही अहिंसा है। जहाँ शांति है वहाँ अहिंसा है और जहाँ अहिंसा है वहाँ शाति है। इससे स्पष्ट होता है कि जहाँ जहाँ आज दुनिया में अशांति है वहाँ हिंसा मानसिक, वाचिक कार्तिक रूप में विद्यमान है। गांधी की दृष्टि में अहिंसा का स्वरूप :- महात्मा गांधी एक तरफ अंग्रेजों से गुलामी को खत्मकरने के लिए लड़ रहे थे तो दूसरी तरफ भारतीय समाज में विद्यमान अधविश्वास, अस्पृश्यता, अलगाव, एवं दारिद्रता जैसी बुराईयाक खिलाफ लड़ रहे थे। इस दौरान अहिंसा को अपना प्रमुख अस्त बनाया जिसकी स्वरूपगत विशेषताएँ निम्नवत है।
अ) अहिंसा पशुबल से ज्यादा श्रेष्ठ है तथा यह मानव जाति का नियम है।
आ) अहिंसा उकसे लिए उपयोगी नहीं है जिसे प्रेम के ईश्वर में जीती-जागती आस्था नहीं है।
इ) अहिंसा मनुष्य के स्वाभिमान और आत्मसम्मान की पूरी तरह रक्षा करती है। मगर अनैतिक कृत्यों की रक्षा करने में अहिंसा सहयोग प्रदान नहीं करती।
ई) अहिंसा का प्रयोग स्वयं की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए दूसरों पर शासन स्थापित करने या चलाने के लिए नहीं।
उ) अहिंसा का प्रयोग कोई भी अपने जीवन में कर सकता है। चाहे वह किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा अथवा आयु का हो।
ऊ) अहिंसा का प्रयोग सिर्फ व्यक्तियों के लिए ही नहीं समूह एवं समुदाय के भी उपयोगी है।
ऋ) अहिंसा जीवन के किसी एकागी पक्ष पर ही नहीं बल्कि जीवन के सम्पूर्ण पक्ष पर लागू होनी चाहिए।
वार्तालाप में शामिल हों