सत्याग्रह का बुनियादी सिद्धांत - Basic Principle of Satyagraha
सत्याग्रह का बुनियादी सिद्धांत - Basic Principle of Satyagraha
गांधी कहते है कि सत्याग्रह के सिद्धांत का असली रूप यह हुआ कि इस व्रत को स्वीकार करने वाला सदा आत्मबल पर निर्भर रहकर अपने शत्रु को किसी प्रकार का कष्ट न देकर अपनी साधना को पूर्ण करने के लिए जिस निमित्त सत्याग्रह व्रत धारण किया हो उसकी प्राप्ति के लिए स्वयं कष्ट भोगेगा।" यदि हम गांधीजी के सत्याग्रह के बुनियादी सिद्धांत को बिन्दुवार लिखना चाहें तो इस प्रकार लिख सकते हैं।
1. मनुष्यमात्र के हृदय में स्थित सत्य सत्याग्रह की बुनियाद है। इसी को अंतकरण की आवाज बन सकते हैं।
2. स्वार्थ के वशीभूत मनुष्य अंतःकरण की इस आवाज को दवा देने का कुछ समय तक प्रयास करता है। पर उसका विरोधी अगर सच्चा सत्याग्रही हो तो अंत में वह आवाज सुननी ही होगी।
3. यह आवाज अनेक रूपों में उसके सामने प्रकट होती है। उसे अपने अन्याय का निश्चय हो जाना और उसके लिए पश्चाताप होना इसका श्रेष्ठ प्रकार है। इसी को हृदय परिवर्तन' या दिल बदलाव कहते
4. विरोधी के हृदय को अंतःकरण की आवाज के प्रति जागृत करना प्रत्येक सत्याग्रह का साध्य है।
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