आपदा प्रबंधन की सतत प्रक्रिया - continuous process of disaster management

आपदा प्रबंधन की सतत प्रक्रिया - continuous process of disaster management


सक्रिय रणनीति


समय और


सतत प्रक्रिया


रोकथाम


त्वरित और


प्रभावी


तैयारी


क्षमता विकास


स्रोत: आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति 2005: पृष्ठ-108 मानवनिर्मित आपदाओं के विपरीत बाद भूकंपों और चक्रवातो को टाला नहीं जा सकता तथापि, जोखिम प्रवण क्षेत्र में विकास कार्य की सही आयोजना के साथ-साथ उपशमन उपायों से, इन खतरों को आपदाओं में तब्दील होने से रोका जा सकता है। ऐसे में पर्यावरण प्रबंधन का साध्य अपने आप पूर्ण होगा इसी विचार के अंतर्गत आपदा प्रबंधन को देश भर में विभिन्न संस्थाओं और सरचनाओ साथ मिलकर कार्यरूप दिया जाने लगा है। आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति 2005 के अनुसार देश के प्रत्येक जिले में एक जिला आपदा प्रबंधक का पद सृजित किया गया है। यह अधिकारी स्थानीय स्तर के विभिन्न सरकारी है। मैत्री और गैर-सरकारी निकायों के सदस्यों के साथ मिलकर जिला आपदा प्रबंधन की एक परियोजना तैयार करता है और उसको अमल में लाने के लिए कार्यरत होता है.


मनुष्य के लिए पर्यावरण या पर्यावरण के लिए मनुष्य इस बहस में अंतर्गत पर्यावरण प्रबंधन और विकास का मुद्दा आज भी फंसा हुआ नज़र आता है। सतत विकास नीति के अंतर्गत वैशक स्तर पर काफ़ी बदलाव लाया है बावजूद इसके विकास की होड़ और आगे बढ़ते रहने की इच्छा से पीड़ित मनुष्य पर्यावरण के प्रति आज भी उतना सचेत नहीं है। केवल नीतियाँ, कानून बनाने से पर्यावरण विकास नहीं होना है। विभिन्न वैश्विक परिषदों में नए-नए नियम बनाए गए हैं, लेकिन विकसित और विकासशील के खेमे में बँटा विश्व अपने ही द्वारा बनाए गए नियमों पर न चलने के लिए मजबूर है।


इन परिस्थितियों को बदलने के लिए भारत सरकार ने पर्यावरण शास्त्र को सभी पाठ्यक्रमों में आवश्यक तथा अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया है। पर्यावरण बचाव जैसे आंदोलनों ने तीव्रता पकड़ ली है। गैर-सरकारी संगठन, स्वयंसेवी संगठन बड़ी मात्रा में इन मुद्दों को लेकर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में इनके साथ मिलकर सामाजिक कार्य पर्यावरण शिक्षा, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, जैसे मुद्दों पर कार्यरत है। 


आपदा प्रबंधक के रूप में वे अपनी भूमिका का निर्वहन बखूबी कर रहें हैं। हाल ही में भारत के योजना आयोग के विशेषज्ञों ने समावेशी विकास में अल्प कार्बन रणनीति पर अपनी रिपोर्ट (2014) जमा की है, जो बेहद अहम् है लेकिन इसकी उपेक्षा की जा रही है। पर्यावरण बनाम विकास के मुद्दे ने पर्यावरणवादको जन्म दिया है, जिसमें आधुनिक विकास के लालच भरे विचारों के चलते पर्यावरण संरक्षण के सारे नीति नियम धराशाही हो रहे हैं।