वर्तमान युवा विकास - current youth development

वर्तमान युवा विकास - current youth development

जैसे कि भारत की राष्ट्रीय युवा नीति-2014 में युवाओं को 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के रूप में परिभाषित किया गया है। चे इस वर्ग को जनसांख्यिकीय लाभ के रूप में परिभाषित करते हैं। उनके अनुसार युवा विकास और देश का विकास एक दूसरे पर निर्भर हैं इसके लिए युवा विकास के माध्यम से ही देश का विकास किया जाना चाहिए। जैसे कि युवा कार्यक्रम और खेल विभाग की रिपोर्ट 2013-14 में लिखा है. "इस जनसांख्यिकीय लाभ के इष्टतम उपयोग के लिए आवश्यक है कि हमारी अर्थव्यवस्था श्रमिक बल की वृद्धि में सहायता करने में सक्षम हो और युवाओं के पास समुचित शिक्षा कौशल, स्वास्थ्य जागरूकता और अन्य सक्षमता हो, जिससे वे अर्थव्यवस्था में प्रभावोत्पादकपूर्ण तरीके से योगदान कर सकें।"


युवा विकास के लिए बनाई गई भारत की राष्ट्रीय युवा नीति 2014 में निम्न विजन को शामिल किया गया है "देश के युवाओं को अपनी पूर्ण क्षमता का विकास करने के लिए सशक्त बनाना तथा उके माध्यम से भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसका सही स्थान दिलाना।"


एनवायपी-2014 का घोषवाक्य है, सपनों को वास्तव में लाने हेतु भारत के समर्थ युवा (Enabling India's Youth to Realize their dreams)| एनवायपी-2014 में दर्शाया जा रहा है कि वर्तमान में युवा शक्ति के रूप में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार भारत में 15 के 29 वर्ष आयु के युवा27 5% हैं। नीति निर्माता यह आशा रखते हैं कि भारत वर्ष 2025 तक अमेरिका, चीन जापान के बाद वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 5.5% से 6% तक योगदान करने वाली चौथी बढ़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। जहाँ एक ओर इनमें से अधिक देशों में श्रम शक्ति के वृद्धि होने का खतरा मंडरा रहा है वहीं दूसरी ओर भारत की जनसाख्यिकीय रूपरेखा बहुत ही अनुकूल होने की आशा रखते है।

वर्ष 2020 तक भारत की जनसंख्या 1.3 बिलियन से अधिक हो जाने की संभावना है जिसकी माध्यम आयु 28 वर्ष होगी, जो कि चीन और जापान की संभावित आयु से काफ़ी कम है। भारत की कामकाजी आबादी वर्ष 2020 तक बढ़कर 592 मिलियन होने की आशा की जा रही है, जो कि केवल चीन (776 मिलियन) कम होगी। इसका यह अर्थ लगाया जा रहा है कि युवा देशके आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे। इस जनसांख्यिकीय लाभ' भारत को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। एनवायपी-2014 ने अपने विजन प्राप्ति के लिए पाँच प्रमुख उद्देश्य और इन उद्देश्यों के प्राप्ति के लिए युवा विकास हेतु ।। प्राथमिकता वाले क्षेत्र चिन्हित किए है, यह निमन्वत है।


उद्देश्य


1. उत्पादक श्रमशक्ति तैयार करना,


2. मजबूत और स्वस्थ पीढ़ी का विकास


3. सामाजिक मूल्यों की शिक्षा देकर सामुदायिक सेवा को बढ़ाना


4. भागीदारी और सामाजिक विनियोजन को बढ़ावा देना


5. जोखिमग्रस्त युवाओं की सहायता करके सभी को समान अवसर प्रदान करना।


•प्राथमिकता वाले क्षेत्र


1. a. शिक्षा,


b. उद्यमशीलता,


c. रोजगार और कौशल।


2. स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन शैली,


b. खेल 


3. 8. सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देना


b. सामुदायिक विनियोजन


4. 3. राजनीति और शासन में भागीदारी,


b. युवा विनियोजन।


5. a. समावेशन


6 सामाजिक न्याया


इस उद्देश्य के प्राप्ति के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में युवाओं के विकास हेतु स्टेकहोल्डमें अंतरराष्ट्रीय संगठन, विभिन्न मंत्रालय तथा मीडिया आदि के सहयोग से इसकी आवश्यकता पूर्ति की जरूरत को महसूस किया गया है। भारत सरकार शिक्षा स्वास्थ कौशल विकास और नियोजन के क्षेत्रों में युवा विकास पर लक्षित योजनाओं पर लगभग37,000 करोड़ रुपये तथा आबादी के विभिन्न वर्गों के लिए बनाई गई उन योजनाओं पर लगभग55,000 करोड़ रुपए व्यय करती हैं, जिनका मुख्य लक्ष्य युवा न होते हुए भी, इसके लाभार्थियों में काफी युवा होते हैं। यह व्यय कुल मिलाकर लगभग 2710 रुपए प्रति युवा है, जिसमें से 1,100 रुपए लक्षित व्यय है।


नीति के अंतर्गत युवा विकास की पहल सराहनीय है। बावजूद इसके इस उद्देश्य प्राप्ति के लिए काफ़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। भावी कार्ययोजना के विषय में कुछ सिफ़ारिशों पर भी हमें गौर करना चाहिए। युवा विकास की चुनौतियों की व्यापकता को देखते हुए सभी स्टेकहोल्डरों द्वारा समेकित प्रयास किए जाने की अत्यावश्यकता को रेखांकित किया गया है। साथ ही इस बात की आवश्यकता को भी महसूस किया गया है कि युवा विकास और उनकी भागीदारी के लिए निर्धारित उद्देश्यों के संबंध में स्टेकहोल्डरों के बीच तालमेल हो और युवाओं के समग्र विकास में मदद करने के लिए ऐसे नवीन समाधानों को खोजा जाए, जिनमें उपलब्ध संसाधनों और साधनों का इस्तेमाल हो। सिफारिशों को निम्न बिंदुओं के आधार पर रेखांकित किया गया, जैसे


1. जनसंख्या से लाभ प्राप्त करने के लिए भारत सरकार को युवा विकास के क्षेत्र में अधिक निवेश करने की जरूरत है, 


2. युवाओं से जुड़े मुद्दों को विकास प्रक्रिया की मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए इसके लिए


● आरएफडी (परिणाम फ्रेमवर्क दस्तावेज) में युवा विकास को शामिल करना तथा


● प्रमुख मंत्रालयों को यूथ कनेक्ट कार्यक्रम बनाना चाहिए।


3. सभी स्टेकहोल्डरों की भूमिका तय करना और इन पर चर्चा करना 


4. युवाओं के प्रभावी विनियोजन और भागीदारी के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग करना जैसे


• युवाओं से काम लेने के लिए आईसीटीसूचना और संचारप्रौद्योगिकी)का इस्तेमाल तथा


● मौजूदा संगठनों के ज़रिए युवा विकास को बढ़ावा देना। वर्तमान समय की माँग के अनुरूप युवा विकास को राष्ट्र के आर्थिक ढाँचे को मजबूती प्रदान करने हेतु युवा नीति को बनाया गया है, जिसमें युवकों के विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया गया है। कुछ समय पहले जनसंख्या वृद्धि को समस्या के रूप में रेखांकित किया जा रहा था उसी समस्या को सकारात्मक नजरिए से देखते हुए संभावनासम (Probartunity) बनाने का प्रयास इस नीति के अंतर्गत किया जा रहा है।


इस नीति के अनुरूप देश में विभिन्न मंत्रालयाद्वारा अनेकों कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। युवा कार्य और खेल मंत्रालय जैसा एक खास विभाग युवा विकास को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजन एवं क्रियान्वयन कर रहा है साथ ही नेहरू युवा केंद्र राष्ट्रीय सेवा योजना जैसे कार्यक्रम आज भी युवा विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भागीदारी दर्ज कर रहें है। इसमें से कुछ कार्यक्रमों को संक्षेप में समझेंगे।