पर्यावरण प्रबंधन - Environmental Management
पर्यावरण प्रबंधन - Environmental Management
जैसा कि इस नाम से लग सकता है पर्यावरण प्रबंधन का तात्पर्य पर्यावरण के प्रबंधन से नहीं है बल्कि आधुनिक मानव समाज के पर्यावरण के साथ संपर्क तथा उस पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रबंधन से है। प्रबंधकों को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख मुद्दे हैं.
राजनीति (नेटवर्किंग)
कार्यक्रम (परियोजनायें)
संसाधन (घन, सुविधाएं आदि)
पर्यावरण प्रबंधन की आवश्यकता को कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। पर्यावरण प्रबंधन के पीछे एक आम विचार तथा प्रेरणा है करीविंग केपेसिटी (वहन क्षमता) की अवधारणा आसान भाषा में कहें तो बहन क्षमता का तात्पर्य किसी विशेष पर्यावरणीय तंत्र द्वारा अपने भीतर जीवों की अधिकतम संख्या को धारण करने की क्षमता से है। हालांकि कई संस्कृतियों को ऐतिहासिक रूप से बहन क्षमता की अवधारणा की समझ थी, लेकिन इसका मूल माल्यूसियन थ्योरी में है। पर्यावरण प्रबंधन काअर्थ केवल पर्यावरण की खातिर उसके संरक्षण से नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति की खातिर पर्यावरण के संरक्षण से है। अत मानव तथा पर्यावरण के मध्य संबंध सुधार की क्रिया ही पर्यावरण प्रबंधन है।
पर्यावरण प्रबंधन में जैवभौतिक वातावरण के सभी घटक शामिल होते हैं, जीवित (जैविक) तथा मृत (अजैव) दोनों। इसका कारण है सभी जीवित प्रजातियों और उनके निवास स्थानों के बीच परस्पर रूप से आपस में जुड़े हुए संबंधा पर्यावरण में मानव पर्यावरण के आपसी संबंध भी शामिल हैं जैसे कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश का जैकभौतिक वातावरण के साथ संबंध।
सभी प्रबंध कार्यों के समान इसके लिए भी प्रभावी प्रबंधन मानकों और प्रणालियों की आवश्यकता होती है। वैश्विक स्तर पर पर्यावरण प्रबंधन के मानक या प्रणाली या प्रोटोकॉल किसी उपयुक्त मानदंड द्वारा मापे गए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की चेष्टा करते हैं। आईएसओ 14001 मानक, पर्यावरण, जोखिम प्रबंधन के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला मानक है और यह यूरोपियन इकोमैनेजमेंट एंड ऑडिट स्कीम (EMAS) के साथ काफ़ी करीबी रूप से जुड़ा हुआ है। एक सामान्य ऑडिटिंग मानक के रूप में आईएसओ 19011 मानक में इसे गुणवत्ता प्रबंधन के साथ जोड़ने के बारे में बताया गया है।
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