गांधी की हिंसा दृष्टि एवं भारत का जीवन पथ - Gandhi's Vision of Violence and the Life Path of India

गांधी की हिंसा दृष्टि एवं भारत का जीवन पथ - Gandhi's Vision of Violence and the Life Path of India

महात्मा गांधी भारत को सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह एवं ब्रम्हचर्य के मूल्यों को धारण करने वाला देश मानते है। गांधी भारत को इसी लिए प्रेम की भूमि मानते थे। वे खुद कहते हैं कि भारत को पूर्ण अधिकार है कि वह चाहे तो वास्तविक हिंसा के जरिए राष्ट्र की आजादी प्राप्त कर सकता है। पर वह हिंसा भारत को मेरी दृष्टि में दोयम स्थिति में पहुंचा देगी। हिंसात्मक माध्यम से देश की स्वतंत्रता मेरी आत्मा पर बोझ बन कर रह जायेगी। क्योंकि साधन अशुद्ध होने के बाद साध्य कभी भी शुद्ध नहीं हो सकता है। इस स्थिति में गांधी जी कहते हैं कि भारत हमारे लिए जन्म की भूमि तो हो सकता है मगर प्रेम की भूमि नहीं हो सकता है। क्योंकि मां भी पथभ्रष्ट हो जाये तो वह पुत्र के लिए गौरव की बात नहीं रह जाती है।

गांधी जी हिंस के जगह अहिंसा को देश की स्वतंत्रता हेतु साधन के रूप में स्वीकारते है। उनका मानना था कि जब भारत हिंसा के बल पर स्वतंत्रता प्राप्त कर लेगा तो भारत की नींव कमजोर हो जायेगी। भारतीय मूल्य कमजोर हो जायेंगे जिसके कारण स्वतंत्र भारत प्रेम शांति एवं खुदाहाली की भूमि के जगह हिंसा अशांति एवं मातम की भूमि बन जायेगा। गांधी जी आगे कहते हैं कि भारत जय अहिंसा, त्याग एवं समय के साथ आजादी प्राप्त करेगा तो भारत की आन्तरिक सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था मजबूत होगी। जिसके कारण दुनिया का कोई देश अपने सैन्य ताकत के बल पर भी भारत को कमजोर नहीं कर सकता है।