जन सत्याग्रह मार्च - Jan Satyagraha march
जन सत्याग्रह मार्च - Jan Satyagraha march
यह एकता परिषद द्वारा चलाया गया एक अहिंसक पदयात्रा अभियान है जो ग्वालियर से 2 अक्टूबर 2012 को आरंभ होकर 29 अक्टूबर 2012 को दिल्ली तक चलाया गया था और यह 350 किलोमीटर के पूरे सफर को तय करता है। जन सत्याग्रह गांधी द्वारा चलाये गए नमक सत्याग्रह (1930) पर आधारित है। जन सत्याग्रह मार्च अहिंसक रूप से कार्य करने वाले लोगों का एक अनुशासित संगठन है जो बड़े जनसमूह संगठित करने का प्रयास है ताकि ग्रामीण भारत की कृषि और खाद्यान्न उत्पादन के महत्वों को उजागर किया जा सके जो कि नगरीय भारत के भविष्य निर्माण हेतु आवश्यक है। इस जनसत्याग्रह को निम्न उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु चलाया गया था।
• एक व्यापक राष्ट्रीय भूमि सुधार अधिनियम और प्रभावी कार्यान्वयन व निगरानी के संस्थानों की व्यवस्था की जाय जो गरीब, भूमिहीन, बेघर और हाशिए के समुदायों के लिए भूमि और आजीविका के संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध करा सकें।
गरीब भूमिहीन और बेघर (ग्रामीण और शहरी) के लिए भूमि फिर से वितरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिएसभी उपलब्ध कानूनों, नीतियों (केंद्रीय कानूनों के साथ ही राज्य कानून) में व्यापक रूपरेखा तैयार करने की आवश्यकता है और समयबद्ध तरीके से कार्यान्वित करने की आवश्यकता है।
● भूमि से संबंधित मुद्दों पर केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा गठित विभिन्न समितियों द्वारा किए गए, प्रगतिशीत सिफारिशों (जिन्हें लंबित रखा गया है। को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए)
एक कानूनों प्रावधान का निर्माण किया जाना चाहिए जिसमें महिलाओं को पारिवारिक भूमि जोत के वितरण में बराबर का दर्जा दिया जाय और यह अगली योजना अवधि के भीतर किया जाना चाहिए। सरकार को यह लगातार सुनिश्चित करते रहना चाहिए कि महिलाओं का सार लाभ मिले जो एक किसान होने के नाते मिलते हैं। साथ ही साथ एकल महिलाओं को एक स्वतंत्र शौर्षक सुनिश्चित करने की प्राथमिकता दी जानी चाहिए
● भूमि, जल, वन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधन, जो किसी भी समूह के लिए जीवन निर्वाह का साधन उपलब्ध करते हैं, का बिना किसी पूर्व अनुमति/ सूचना के अन्य प्रयोजन हेतु विनियोजन नहीं होना चाहिए और सहमति के पश्चात इसके प्रयोग हेतु एक वैयक्तिक अथवा सामुदायिक पट्टा व्यवस्था होनी चाहिए।
● प्रशासनिक और अन्य अधिकारियों द्वारा गरीबों के मूलभूत अधिकारों के हनन तथा भूमि, जल, वन और खनिजों से संबंधित संवैधानिक अधिकारों का कार्यान्वयन न किए जाने पर दंडात्मक कारवाई की जानी चाहिए।
8 अक्टूबर को एकता परिषद और तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के मध्य समझौता हुआ जिससे कि आगरा में मार्च को रोका गया। इस सत्याग्रह के परिणामस्वरूप दो बातों पर अमल करने का आश्वासन दिया गया
• अगले छः महीनों के अंदर राष्ट्रिय भूमि सुधार नीति का एक मसौदा पेश किया जाएगा और शीघ्र हो उसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
● भूमिहीन लोगों को कृषि हेतु भूमि उपलब्ध कराने और बेघर लोगों को उनके राज्य-क्षेत्र में आवास उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान बनाया जाएगा।
सामान्य तौर पर आंदोलनों का सृजन किसी न किसी असंतोष के परिणामस्वरूप होता है। नव सामाजिक आंदोलन भी इसकी परिधि से बाहर नहीं है। ये भी असंतोष के परिणामस्वरूप ही उत्पन्न होते हैं परंतु मोटे तौर पर ये अस्मितापरक असंतोष से जन्मते हैं। इस इकाई में नव सामाजिक आंदोलन के क्षेत्र में अवस्थित पर्यावरणीय आदोलन, नारीवादी आदोलन, मानवाधिकार आदोलन और छात्र आंदोलनों की रूपरेखाको प्रस्तुत किया गया है।
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