गांधी की दृष्टि में अहिंसा का स्वरूप - The nature of non-violence in the eyes of Gandhi

गांधी की दृष्टि में अहिंसा का स्वरूप - The nature of non-violence in the eyes of Gandhi

महात्मा गांधी एक तरफ अंग्रेजों से गुलामी को खत्म करने के लिए लड़ रहे थे तो दूसरी तरफ भारतीय समाज में विद्यमान अंधविश्वास अस्पृश्यता अलगाव एवं दारिद्रता जैसी बुराईयोंके खिलाफ लड़ रहे थे। इस दौरान अहिंसा को अपना प्रमुख अस्त्रबनाया जिसकी स्वरूप विशेषताएँ निम्नवत है।


अहिंसा पशुबल से ज्यादा श्रेष्ठ है तथा यह मानव जाति का नियम है।


ए) अहिंसा उकसे लिए उपयोगी नहीं है जिसे प्रेम के ईश्वर में जीती-जागती आस्था नहीं है।


ऐ) अहिंसा मनुष्य के स्वाभिमान और आत्मसम्मान की पूरी तरह रक्षा करती है। मगर अनैतिक कृत्यों की रक्षा करने में अहिंसा सहयोग प्रदान नहीं करती। 


ए) अहिंसा का प्रयोग स्वयं की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए दूसरों पर शासन स्थापित करने या चलाने के लिए नहीं।


ऐ) अहिंसा का प्रयोग कोई भी अपने जीवन में कर सकता है। चाहे वह किसी जाति, धर्म, क्षेत्र, भाषा अथवा आयु का हो ।


ऑ) अहिंसा का प्रयोग सिर्फ व्यक्तियों के लिए ही नहीं समूह एवं समुदाय के लिए भी उपयोगी है।


ओ) अहिंसा जीवन के किसी एकागी पक्ष पर ही नहीं बल्कि जीवन के सम्पूर्ण पक्ष पर लागू होनी चाहिए।