ध्वनि प्रदूषण - Noise Pollution
ध्वनि प्रदूषण - Noise Pollution
अत्यधिक शोर, जिससे हमारी दिनचर्या बाधित हो और सुनने में अप्रिय लगे ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। ध्वनि प्रदूषण या अत्यधिक शोर किसी भी प्रकार के अनुपयोगी ध्वनियों को कहते हैं, जिससे मानव और जीव अतुओं को परेशानी होती है। इसमें यातायात के दौरान उत्पन्न होने वाला शोर मुख्य कारण है। जनसंख्या और विकास के साथ ही यातायात और वाहनों की संख्या में भी वृद्धि होती है, जिसके कारण यातायात के दौरान होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ने लगता है। अत्यधिक शोर से सुनने की शक्ति चले जाने का खतरा होता है।
ध्वनि प्रदूषण के स्रोत
दुनिया भर में सबसे ज्यादा शोर के स्रोत परिवहन प्रणालियों, मोटर वाहन का शोर है, किंतु इसमें वैमानिक शोर-शराबा तथा (aircraft noise) रेल से होने वाला शोर भी शामिल है। खराब शहरी नियोजन (urban planning) ध्वनि प्रदूषण को बढ़ा सकता है क्योंकि इसके साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय इमारतें आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण का कारण बन सकते हैं। अन्य स्रोतों में कार्यालय के उपकरण, फैक्टरी मशीनरी, निर्माण कार्य, उपकरण, बिजली उपकरण, प्रकाश व्यवस्था (lighting), ऑडियो मनोरजन सिस्टम आते है।
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव
पसंद न की जाने वाली ध्वनि को ध्वनि शोरशराबा कहा जाता है। यह अवांछित ध्वनि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को हानि पहुँचा सकती है। ध्वनिक प्रदूषण चिड़चिड़ापन एवं आक्रामकता के अतिरिक्त उच्च रक्तचाप, तनाव, कान के परदे का फटना, श्रवण शक्ति का हास, नींद में गड़बड़ी और अन्य हानिकारक प्रभाव पैदा कर सकता है। इसके अलावा तनाव और उच्च रक्तचाप स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख हैं, जबकि स्मृति खोना गंभीर अवसाद और कई बार असमंजस के दौरे पैदा कर सकता है। शोर-शराबा का उच्च स्तर हृदय संबंधी रोगों (cardiovascular) को जन्म दे सकता है। आठ घंटे की एकल अवधि के दौरान माध्यमिक उच्च स्तर के प्रभाव में आने से रक्त चाप में पाँच से दस बिंदुओं तक की वृद्धि तथा तनाव (stress)एवं बेसोकन्सट्रिक्शन (vasoconstriction) में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे उच्च रक्तचाप (increased blood pressure) के साथ-साथ कोरोनरी आर्टरी रोग (coronary artery disease) हो सकते हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव
शोर-शराबा पशुओं में तनाव पैदा करनेप्रीडेटर/शिकार की पहचान तथा बचाव एवं प्रजनन एवं नवीगेशन के संबंध में संप्रेषण के समय ध्वनि के उपयोगके साथ हस्तक्षेप द्वारा नाजुक संतुलन को परिवर्तित करते हुए जानवरों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। अधिक देर तक ध्वनिक प्रतिछाया में बने रहने से अस्थायी या स्थायी तौर पर श्रवण शक्ति का हास हो सकता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाली क्षति के सर्वोत्तम ज्ञातमामलों में से एक समुद्री व्हेल (heached whale) की कुछ विशेष प्रजातियों की मृत्यु होती है जिन्हें सेना की तोपों की भयंकर गर्जना अर्थात् सोनार (sonar) द्वारा समुद्र के किनारे ला दिया जाता है।
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