अहिंसक संघर्ष एवं महात्मा गांधी - Nonviolent Struggle and Mahatma Gandhi

अहिंसक संघर्ष एवं महात्मा गांधी - Nonviolent Struggle and Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी जिस सत्य एवं अहिंसा को अपने जीवन के लिए साधन के रूप में मानकर दुनिया की बुराइयों को मिटाने के लिए खड़े हुए ये उस समय पूरा विश्व उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, गरीबी हिंसा एवं महामारी से आच्छादित था। भारत में भी यह सभी बुराईयों विद्यमान थी। गांधीजी अहिंसा के बल पर इन बुराईयों को खत्म करने का प्रयास किया तथा काफी हद तक अपने इस उद्देश्य में वे सफल भी रहे। उनका अहिंसक संघर्ष प्रेम युक्त संघर्ष था।

वे व्यक्ति से संघर्ष न करके विचारधारा एवं व्यवस्था से संघर्ष किये गांधी जी खुद कहते है कि अहिंसा का पालन करे जब आप के चारों तरफ हिंसा का नाच हो रहा हो। अहिंसक व्यक्ति के साथ अहिंसा पूर्ण व्यवहार करना बहुत बड़ी बात नहीं है हिंसा करने वाले व्यक्ति के साथ हिंसा का व्यवहार करना बड़ी बात है। अहिंसक संघर्ष की प्रक्रिया में व्यक्ति को पाप से घृणा करना चाहिए पापी से नहीं गांधी अपने अहिंसक संघर्ष की प्रक्रिया में मानते थे कि बुरे से बुरे व्यक्ति के हृदय में प्रेम होता है। हमें अहिंसा के बल पर हृदय परिवर्तन हेतु संघर्ष करने चाहिए।