सत्याग्रह की सफलता के लिए आवश्यक शर्तें - Prerequisites for the success of Satyagraha

सत्याग्रह की सफलता के लिए आवश्यक शर्तें - Prerequisites for the success of Satyagraha

गांधीजी ने हरिजन में अपने एक लेख में सत्याग्रह की सफलता की आवश्यक शर्तें गिनाई है, जिसमें सहन को भी शामिल किया गया है।


1. सत्याग्रही के मन में विरोधी के लिए पूणा की भावना नहीं होनी चाहिए।


2. सत्याग्रही का मुद्दा सच्चा और महत्त्वपूर्ण होना चाहिए। 


3. सत्याग्रही को अपने ध्येय की पूर्ति होने तक पीड़ा भोगने के लिए तैयार रहना चाहिए।


गांधीजी ने समय-समय पर सत्याग्रह के विशेषताओं की उल्लेख किया है। जिन्हें हम निम्न बिंदुओं में लिख सकते है. 


1. मानव प्रकृति में बदलने की अनंत सभावनाएं है। सत्याग्रह का मनुष्य की बुनियादी अच्छाई में पूरा विश्वास है। 


2. सत्याग्रह में कोई शत्रु नहीं होता, विपक्षी होता है। विपक्षी के प्रति दुर्भावना नहीं होती, उसके दृष्टिकोण में परिवर्तन लाया जाता है ताकि बदले हुए दृष्टिकोण से वह व्यवहार कर सकें।


3. सत्याग्रह पूर्ण रूप से अहिसंक होता है। 


4. सत्याग्रह अंतिम अस्व के रूप में प्रयुक्त होता है।


5. विपक्षी की कमजोरी का फायदा नहीं उठाना चाहिए।


 6. सत्याग्रह में अभय बढी महत्वपूर्ण बात है। सत्याग्रही को हर तरह के डर से खुद को मुक्त करना होता है। 


7. सत्याग्रह के प्रयोग से कम से कम हानि होती है। हिंसा द्वारा समाप्त एवं नष्ट किए गए प्राणियों, वस्तुओं का लौटना असंभव होता है। सत्याग्रह यह अवसर देता है कि बिना हिंसाके उद्देश्य तक पहुंचा जाए अगर सफलता नहीं भी मिलती है तो भी दूसरों को हानि पहुंचाने के दोष से तो बचा ही जा सकता है।


8. सत्याग्रह का उद्देश्य विपक्षी के हृदय में विद्यमान आत्मवल प्रेमबल की करना होता है। अगर ऐसा न भी कर सकें तो स्वयं अपने मन में दबे उच्चत्तम भावों व आत्मवल को जागृत रही है। इसलिए सत्याग्रह स्वयं सत्याग्रही के लिए भी लाभदायक है। 


9. सत्याग्रह में पराजय जैसी कोई बात नहीं है।


10. सत्याग्रह में झूठ, गोपनीयता के लिए कोई स्थान नहीं है। 


11. सत्याग्रह में प्रतिपक्षी पर सदैव भरोसा किया जाता है।


12. सत्याग्रह में प्रतिपक्षी से घृणा के लिए कोई स्थान नहीं है।


13. सत्याग्रही सदैव बातचीत करने के लिए तैयार रहता है। हर स्थिति में वह सत्याग्रह से प्रारंभ स्थिति से अधिक बेहतर स्थिति होती है क्यों कि वह प्रतिपक्षी को बातचीत के लिए प्रेरित कर सका संवाद हीनता से संवाद तक की प्रक्रिया तक आना सत्याग्रह की जीत होती है। गांधीजी अपने आंदोलनों में हमेशा बातचीत के किसी भी प्रस्तावको तत्परता से लेते थे। प्रतिपक्षी से संचाद के किसी मौके को जाने नहीं देते थे। सत्याग्रही यद्यपि हर समय संघर्ष के लिए तैयार रहता है, पर उसे शांति के लिए भी उतना ही उत्सुक रहना चाहिए। उसे शांति के किसी भी सम्मान जनक अवसर का स्वागत करना चाहिए।


14. सत्याग्रह व्यक्ति और उसके बुरे कर्मों को अलग-अलग करके देखना है यानि वह पाप का विरोध करता है, पापी का नहीं।


15. गांधीजी ने सत्याग्रह के सबसे शक्तिशाली हथियार के रूप में जागत तथा प्रबुद्ध जनमत को बताया है।


सत्याग्रह के बारे में उपरोक्त विचारों के बाद हम यह कह सकते है कि सत्याग्रह की विशेषता उसके उद्देश्य में सत्यपूर्ण होने के साथ-साथ प्रक्रिया में भी सत्यपूर्ण होने में है। स्थायी हानि से छुटकारा इसकी प्रमुख से


विशेषताओं में है जो हिंसा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत होती है। उपरोक्त गिनायी गयी सत्याग्रह की विशेषताओं के साथ-साथ सत्याग्रही के लिये आवश्यक योग्यताएं भी बतायी गयी है। हम यहाँ उसे अलग विदुबार प्रस्तुत कर सकते है।