आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Mahatma Gandhi in the field of spirituality
आध्यात्मिकता के क्षेत्र में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Mahatma Gandhi in the field of spirituality
महात्मा गांधी कुशल वकील राजनीतिज्ञ एवं समाजसेवी के साथ-साथ एक संत भी थे। संत के रूप में उनका आध्यात्मिक जीवन बड़ा ही सयमित तथा लोक संदेशगामी था। महात्मा गांधी ईश्वर में अटूट विश्वास करते थे। वे कहते थे कि आत्मा में ईश्वर का ध्यान करने से अटूट शक्ति प्राप्त होती है। गांधी के जीवन के एकादश न्नत के प्रारम्भिक पचि मूल्य सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह एवं ब्रम्हचर्य की स्थापना जैन, बौद्ध एवं हिन्दू धर्म में भी की गई है। गांधी जी सत्य को ईश्वर मानते थे तो इस सत्य को प्राप्त करने के लिए अहिंसा को साधन मानते थे लोक कल्याण के दृष्टि से अस्तेय (चोरी न करना तथा अपरिग्रह (अपनी आवश्यकता से ज्यादा धन न रखना) के सिद्धांत का पालन करने की बात करते हैं। गांधी जी समाजसेवी लोगों को अविवाहित रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करने की बात करते हैं। वही अस्वाद के लिए जाने के साथ नीम की पक्षी की चटनी खाते थे। आज के राजनेता एवं समाजसेवी गांधी जी से आध्यात्मिक प्रेरणा ले तो बहुत ही अच्छा होगा।
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