विविध क्षेत्रों में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Mahatma Gandhi in various fields
विविध क्षेत्रों में महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Mahatma Gandhi in various fields
महात्मा गांधी भारत ही नहीं संपूर्ण दुनिया में सत्य एवं अहिंसा का संदेश फैलाने वाले पुण्य आत्मा थे। उनकी दृष्टि में सदैव गीता के कर्मयोग, सांख्ययोग, भक्तियोग एवं राजयोग की ज्योति जलती थी। भारत ऋषियों एवं सत्तों की भूमि रही है। यहाँ महावीर, महात्मा बुद्ध कबीरदास रविदास एवं शंकराचार्य जैस आप्त पुरुष पैदा हुए। जिन्हीं ने सत्य के साथ अहिंमा को महत्वपूर्ण मानवीय मूल्य माना। परन्तु महात्मा गांधी सत्य एवं अहिंसा को सैद्धान्तिक स्तर से व्यावहारिक स्तर पर उतारा गाधी का संपूर्ण जीवन दिग्विजयी एवं आत्मजयी के मध्य संतुलन का रहा है। गांधी ने अतिरेक के जगह समन्वय का दर्शन अपने जीवन में अपनाया। व्यवहार एवं सिद्धांत दोनों अपने अंतर को गांधी के पास पहुंचकर खत्म कर देते हैं। गांधी की दृष्टि में व्यवहार परक सिद्धांत ही प्रासंगिक हैं।
अंतर को गांधी के पास वर्तमान विश्व एवं गांधी की प्रासंगिकता:- आज पूरे दुनिया की लगभग सात अरब मानवीय जनसंख्या हो चुकी है। विचारधारा के तौर पर हम देखे तो पूँजीवाद संपूर्ण दुनिया में अपना पैर जमा चुका है। (प्रतिफल व्यक्तिवाद उपभोक्ता अलगाववाद, संघर्षवाद, अतिप्रतिक्रियाबाद क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद, आतंकवाद जैसी विचारधाराएँ भी पूरी दुनिया में हिलोरे मार रही है। इन विचारधाराओं के सक्रिय रूप के कारण पूरी दुनिया हिंसा, भ्रष्टाचा, संवेदनहीनता असहिष्णुता जैसी बीमारी से ग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में महात्मा गांधी का जीवन दर्शन एवं सिद्धांत ही एक मात्र आधार है जिस पर विनाश के मुख्य में जा रही मानवता को बचाकर पुन: नवीन कलेवर में स्थापित किया जा सकता है। आज राष्ट्रबाद के नाम पर देशों के बीच हिंसा एवं प्रति हिंसा जारी है जिसके कारण मानवता का संधार हो रहा है। ऐसे में गांधी के अंतरराष्ट्रीय दर्शन का सहारा लिया जा सकता है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि गांधी आज भारतीय एवं विश्व दोनों समाज के लिए अनेक दृष्टि से प्रासंगिकता रखते है।
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