विश्व परिवार एवं महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Vishwa Parivar and Mahatma Gandhi
विश्व परिवार एवं महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Relevance of Vishwa Parivar and Mahatma Gandhi
संपूर्ण विश्व एक परिवार है। वसुधैव कुटुम्बकम हमारी संस्कृति का मूलार्थ रहा है। जब देश आजाद हुआ तो गांधी जी ने कहा कि यह स्वतंत्रता नहीं स्वराज्य प्राप्त हुआ है जिसमें विश्व नागरिक बनेका भाव हुया है। गांधी जी किसी भूगोल खण्ड की मान करके संपूर्ण विश्वी के मानवता की बात करते है। जब वह दक्षिण अफ्रीका में थे तो वहाँ पर रोगियों एवं पायला की देखरेख के लिए कोसों दूर पैदल चलरक जाते थे। उनका जीवन जाति धर्म से भी ऊपर था इसीलिए हिन्दू धर्म को अपना धर्म मानते हुए भी मुसलमानों के लिए लड़ते रहे। इसलिए आज के व्यक्तिवादी एवं संकीर्णता वृद्धि समाज में गांधी के विचारों प्रासंगिकता बनती है।
आधुनिकभारत के निर्माण में गांधी की प्रासंगिकता महात्मा गांधी गीता को अपनी माँ मानते थे। गीता में कर्म को प्राथमिकता दी गई है। गीता निक्काम कर्म की बात करती है। निक्काम कर्म का पुरुषार्थ से गहरा रिस्ता है। पूरे मन वचन एवं शरीर से किसी कर्म को करने की प्रतिबद्धता का नाम ही पुरुषार्थ कहलाता गहरा रिस्ता है। पूरे मनः वचन एवं शरीर से किसी कर्म को करने की प्रतिबद्धता का नाम ही पुरुषार्थ कहलाता है। महात्मा गांधी भारत के लोगों को कहते हैं कि धार्मिक जीवन का अर्थ कर्मों से पलायनता नहीं कमों के प्रति अनासक्त होकर कर्म करना ही सबसे बड़ी पूजा है। इसलिए भारतीय लोगों को भाम्यवादी सोच को खत्म करके पूरे पूरुषार्थ में कर्म करने की आवश्यकता है। कहा भी जाता है कि भगवान उसी की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं।
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