सत्याग्रह और दुराग्रह - Satyagraha and Violence

सत्याग्रह और दुराग्रह - Satyagraha and Violence

जब हम गांधीजी द्वारा प्रस्तुत सत्याग्रह के सिद्धांत पर हम बात करते हैं तो एक बात आवश्यक रूप से सामने आती है वह है सत्याग्रह और दुराग्रह में भेद करना। गांधीजी लिखते है बलात लादे हुए दुःखों से मुक्ति का उपाय ज्ञानपूर्वक दु:ख सहना है, यही सत्याग्रह है।

दुःखों से मुक्ति के लिए दुःख देना दुराग्रह और पशुबल है।" गांधीजी इस संक्षिप्त उद्धरण में सत्याग्रह व दुराग्रह का अर्थ सटीकता से प्रस्तुत करते हैं। स्वयं गांधी जी सत्याग्रह को स्वीकार करते हुए भी हिंसा व अहिंसा के इन्द्र को पहचानते है परन्तु सत्याग्रह में शत्रु नहीं, विपक्षी होता है। वर्तमान समय में जॉन बोनड्यूरेट जैसी विश्लेषण सत्याग्रह के मूल में एक गांधीवादी इन्द्रवाद


(सत्याग्रह दुराग्रह) भी देख लेती है जो वस्तुओं के स्वभाव या समय की प्रगति में नहीं बल्कि मानवीय प्रवृत्तियों और कर्म में व्यक्त होता है लेकिन इस इदं में अहिंसा ही जीवन के संचालक नियम के रूप में प्रतिष्ठित होती है।


सत्याग्रह में स्वेच्छा से दुःख को सहन करना केन्द्रीय महत्व रखता है। प्रत्येक व्यक्ति में अच्छाई बुगई दोनों प्रवृत्तियां होती हैं। अतः विपक्षी के हृदय में विद्यमान अच्छी प्रवृत्तियों को अच्छाई को जगाने के लिए दुःख सहन करना सर्वोत्तम उपाय है। गांधीजी के अनुसार सत्याग्रह में (स्वेच्छापूर्वक) दुःख सहन करने की प्रवृत्ति मानव जाति का नियम है