सत्याग्रह - अर्थ एवं परिभाषा Satyagraha - Meaning and Definition

सत्याग्रह - अर्थ एवं परिभाषा Satyagraha - Meaning and Definition

इतिहास की शुरूआत से ही समाज में संघर्ष विद्यमान रहे है और मनुष्य इस संघर्ष के खिलाफ से आवाज उठाता रहा है। इन संघर्षों से निपटने के दो तरीके है। पहला हिंसक प्रतिरोध यहाँ एक बात गौर करने की है कि हिंसा द्वारा समाधान किये जाने पर जीत ज्यादा हिंसा करने वाले की होती है फिर यह जरूरी नहीं है कि वह सही पक्ष की जीत हो। हिंसा के दौरान जो जान-माल का नुकसान होता है उसकी भरपाई करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि संघर्ष के समाधान के हिंसक पक्ष का कोई विकल्प मौजूद है अथवा नहीं ?


महात्मा गांधी ने संघर्ष के समाधान के लिए हिंसक प्रतिरोध के बरअक्स जो मार्ग बताया वह सक्रिय अस प्रतिरोध का रास्ता है जिसे वह सत्याग्रह का नाम देते है। अपनी प्रविधि में अहिंसक प्रतिरोध कई तरीकों को शामिल करती है वे है- असहयोग, सविनय अवज्ञा, हड़ताल धरना, उपवास आदि


सत्याग्रह एक संयुक्त शब्द है जो दो शब्दों सत्य एवं आग्रह के मेल से बना है। जिसका अर्थ होता है सत्य पर दुखता यानि हर परिस्थितियों में सत्य को ही पकड़कर चलना। प्रो. नंदकिशोर आचार्य ने अपनी पुस्तक 'सभ्यता का विकल्प में कहा है कि सत्याग्रह वस्तुतः एक राजनैतिक प्रौद्योगिकी है।"

इस प्रकार गांधी जी द्वारा प्रस्तुत सत्याग्रह का विचार प्रेम के नियम जो कि अस्तित्व का भी नियम है को राजनीतिक गतिविधियों का आधार बनाना है। गांधी जी ने अनुसार 'सत्याग्रह राजनीति में धार्मिक भावना का समावेश है। यहाँ ध्यान रखने वाली बात यह है कि धर्म का तात्पर्य कोई ऐतिहासिक धर्म नहीं बल्कि सभी धर्मों का सार नैतिकता से है। इस प्रकार गांधी के लिए धर्म का मतलब है विश्व का नैतिक व्यवस्थित शासन। अतः स्पष्ट है कि गांधीजी प्रेम के नियम के आधार पर एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करते हैं जो अपनी प्रक्रिया में भी इसी नियम से संचालित होती है। इसी का नाम सत्याग्रह है। गांधीजी के अनुसार सत्य सबसे बड़ी शक्ति है। सत्य तीन रूपों में गांधीजी के यहां प्रयुक्त होता है।


1. आत्मवल अर्थात् हर व्यक्ति को सत्य पर टिके रहने से आत्मवल प्राप्त होता है। 


2. प्रेमवल यानी अपनी प्रक्रिया में सत्य प्रेमपूर्ण है।


3. न्यायवल अर्थात किसी भी प्रकार के अन्याय अथवा शोषण, दमन और उत्पीड़न के सम्मुख मानवीय समानता, स्वतंत्रता और गरिमा को भौतिक बल की बजाय आत्मबल, पौड़ा देने की बजाय पीड़ा सहकर और घृणा और हिंसा के बजाय प्रेम और अहिंसा के माध्यम से स्थापित करने का प्रयास है।


सत्याग्रह को परिभाषित करते हुए गांधी जी लिखते है


"सत्याग्रह का अर्थ है, जिसे हम सत्य समझते है उसे मृत्यु पर्यन्त न छोड़ना सत्य के लिए चाहे जितनी तकलीफे उठानी पड़े, सच उठाना काट किसी को नहीं पहुंचाना चाहिए क्योंकि कष्ट पहुँचाने ने सत्य का उल्लन होता है। इतना सब सहने की शक्तिया जाना ही सच्ची जीत है।


आगे वह लिखते है कि मेरे लिए सत्याग्रह का नियम प्रेम का नियम, एक शाश्वत नियम है। इसका मूलार्थ को ग्रहण करना है। इससे यह सत्य-शक्ति है। इससे वह सत्य-शक्ति है। मैंने इसे प्रेम-शक्तिया आत्म-शक्ति भी कहा है। सत्याग्रह का उपयोग करने में बिल्कुल प्रारंभिक अवस्था में ही मैंने यह देख लिया कि सत्य के अनुरागमन में विरोधी के प्रति हिंसा करने की गुंजाइश नहीं है, उसकी गलती तो धैर्य और सहानुभूति के द्वारा ही दूर करनी पड़ेगी। क्योंकि जो एक को सत्य जान पड़ता है वहीं दूसरे को गलत ज्ञान पढ़ सकता है। धैर्य का अर्थ स्वयंकष्ट उठाना है। इसलिए सत्याग्रहका अर्थ लिया गया कि विरोधी को पीड़ा देकर नहीं बल्कि स्वयं कष्ट उठाकर सत्य की रक्षा करना।