कल्याणकारी राज्य एवं महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Welfare State and Relevance of Mahatma Gandhi

कल्याणकारी राज्य एवं महात्मा गांधी की प्रासंगिकता - Welfare State and Relevance of Mahatma Gandhi

दुनिया में औद्योगिक क्रांति के बाद सामंतवाद का खात्मा हुआ और जो लोकतात्रिक सरकारे बनाँ उन पर आयाम का यह दबाव बना कि कमजोर पिछड़े एवं हाशिये पड़ खड़े लोगों के सुरक्षा एवं कल्याण के लिए काम करे लोकतांत्रिक सरकारों ने जनता के हित में अनेक कानून एवं कार्यक्रम प्रस्तुत करना प्रारंभ किया। 1215 में ब्रिटेन में मैग्नाकार्टा 1609 में एलिजाबेथ कानून तथा 1941 में बेवरिज रिपोर्ट लाया। ये सारे कानून कहीं न कहीं समाज कल्याण के क्षेत्र में प्रयास थे। राज्य समाज के स्वास्थ्य शिक्षा सुरक्षा एवं जीवन गरिमा के लिए कार्य करता है तो ऐसे राज्य को कल्याणकारी राज्य भी कहा जाता है।


आज जैसे-जैसे समाज में आर्थिक वृद्धि होती जा रही है समाज व्यक्तिवादी स्वरूप को धारण करते जा रहा है इस व्यक्तिवादी स्वरूप का जैसे जैसे विस्तार हो रहा है वैसे-जैसे राज्य की शक्ति बढ़ती जा रही है। राज्य की शांति में वृद्धि के साथ-साथ राज्य के उत्तरदायित्व में भी वृद्धि होती जा रही है। गांधी जी कहते थे कि अच्छी सरकार वह होती है जो जनता पर कम से कम शासन करे। गांधीजी के अनुसार सत्ता का विकेन्द्रीकरण सम्बक शासन व्यवस्था का उदाहरण है। जैसे-जैसे लोकतंत्र का विकेन्द्रीकरण चढ़ेगा समाज के कल्याण के लिए अधिक लोग निर्णय प्रक्रिया में भाग लेगे गांधी जी का यह भी कहना कि लोकतांत्रिक शासन प्रक्रिया में सभी जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के लोगों की भागीदारी ही कल्याणकारी राज्य का असली रूप तैयार कर सकती है। इस प्रकार स्पष्ट होता है कि राज्य को कल्याणकारी स्वरूप धारण करने के लिए गांधी के सत्ता विकेन्द्रीकरण के सिद्धांत को अक्षरशः पालन करना होगा।