सामाजिक बदलाव की विशेषताएँ - Characteristics of Social Change

सामाजिक बदलाव की विशेषताएँ - Characteristics of Social Change

सामाजिक बदलाव की प्रमुख विशेषताएँ अधोलिखित हैं.


1. सामाजिक बदलाव सार्वभौमिक और निरंतर क्रियाशील सामाजिक प्रक्रिया है। संसार में कोई भी दो समाज पूर्ण रूप से सदृश्य नहीं होते हैं। अतः बदलाव भी पूर्णतः एक समान नहीं होते हैं। रॉबर्ट बिरस्टीड के अनुसार, "किन्हीं दो समाजों का इतिहास एक समान नहीं होता, किन्हीं दो समाज की संस्कृति एक जैसी नहीं होती, कोई भी एक-दूसरे का प्रतिरूप नहीं होता।"


1. प्रत्येक समाज में सामाजिक बदलाव की गति अलग-अलग होती है। बदलाव की गति न केवल एक समाज से दूसरे समाज में भिन्न होती है अपितु एक ही समाज के विभिन्न समूहों में भी इसकी गति असमान होती है।


iii. सामाजिक बदलाव समाज से संबंधित होता है। वह व्यक्तिवादी न होकर संपूर्णतावादी होता है और इसी कारण इसका प्रभाव पूरे समाज पर परिलक्षित होता है।


(iv. सामाजिक बदलाव स्वाभाविक और अवश्यम्भावी होता है। यह किसी की इच्छा अनिच्छा पर आश्रित नहीं होता, यद्यपि आधुनिक समय में इसे नियोजित किया जा सकता है। 



V. सामाजिक बदलाव एक व्यापक संकल्पना है, जिसमें सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में होने वाले


सभी प्रकार के परिवर्तनों को सम्मिलित किया जाता है।


vi. चूंकि सामाजिक बदलाव का कोई सार्वभौमिक या निश्चित मापदंड नहीं होता इसलिए सामाजिक बदलाव तुलनात्मक और सापेक्ष होता है। बदलाव को जानने के लिए किन्हीं दो समाजों की तुलना की जानी आवश्यक होती है। 


vii. सामाजिक बदलाव के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। कई बार आकस्मिक कारक द्वारा भी बदलाव लाया जा सकता है, इसलिए सामाजिक बदलाव की दिशा में मात्र अनुमान लगाया जा सकता है, कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। 


viii. सामाजिक बदलाव समय के दो कालख डों के मध्य सामाजिक संरचना और प्रकार्यों में होने वाले किसी भी बदलाव का सूचक है।


iv. सामाजिक बदलाव अमूर्त है। यह संबंधों में होने वाला बदलाव है और संबंधों को न तोदेखा जा सकता है और न ही स्पर्श किया जा सकता है। सामाजिक बदलाव को केवल अनुभव द्वारा जाना जा सकता है। 


x. सामाजिक बदलाव के अनेक प्रतिमान होते हैं, यथा- समरेखीय, उतार-चढ़ाव चक्रवत लहरदार आदि।


xi. इससे किसी भी समाज अथवा समूह के पूर्व की स्थिति और वर्तमान स्थिति में अंतर स्थापित


किया जा सकता है। विलबर्ट ई. मूर के अनुसार मानव अनुभूति में समय का भाव और परिवर्तन का अभ्यास अपृचकनीय रूप से संबद्ध हैं। वे आगे कहते हैं कि समय बिना कोई बदलाव नहीं है। बदलाव के अभाव में इसी प्रकार समय का कोई अर्थ नहीं है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि बदलाव को समय के सापेक्ष ही समझा जा सकता है। 


xii. सामाजिक बदलाव एक मूल्य तटस्थ अवधारणा है। इसमें उद्विकास विकास एवं प्रगति के रूप में होने वाले सभी परिवर्तनों को सम्मिलित किया जाता है।