सामाजिक नियंत्रण के स्वरूप - Forms of Social Control
सामाजिक नियंत्रण के स्वरूप - Forms of Social Control
सामाजिक नियंत्रण को अधिकांश विद्वानों ने निम्न प्रकारों में विभाजित किया है
1) औपचारिक और अनौपचारिक सामाजिक नियंत्रण
औपचारिक नियंत्रण की स्पष्ट परिभाषा रहती है। यह निश्चित लिखित कानूनों द्वारा परिभाषित होता है और व्यक्ति को इसे मानना ही पड़ता है। यदि व्यक्ति ऐसा करता है, तो समाज व्यवस्थित रहता है और ऐसा न करने पर उसे विचारपूर्वक बनाई गई विधियों राज्य सरकार आदि द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ये सभी नियंत्रण के द्वितीयक और औपचारिक साधन है, इसलिए इस प्रकार के नियंत्रण को द्वितीयक नियंत्रण भी कहते हैं।
अनौपचारिक नियंत्रण में चेतन विधियों द्वारा नियंत्रण नहीं किया जाता है। इस प्रकार के नियंत्रण का विकास समूह अपने कल्याण के लिए करता है। यद्यपि इसका विरोध करने पर राज्य द्वारा कोई दंड नहीं दिया जाता है। फिर भी इसमें परिवार और जाती के निष्कासन, समूह को भोज देना, धर्म, रूढ़ि तथा परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए इसे प्राथमिक नियंत्रण भी कहते हैं।
2) चेतन और अचेतन सामाजिक नियंत्रण चेतन सामाजिक नियंत्रण को समाज व्यक्ति पर जान-बूझकर लगाता है यथा कानून, प्रचार, शिक्षा आदि। यह ऐसी परिस्थितियों से संबंधित है जिनके प्रत्येक व्यक्ति जागरूक होते हैं। अचेतन सामाजिक नियंत्रण सामाजिक अंतक्रिया के बीच स्वतः ही विकसित होते हैं। जैसे धर्म, रूढ़ियाँ जनरीतियाँ आदि द्वारा किया गया सामाजिक नियंत्रणा
3) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सामाजिक नियंत्रण कार्ल मैनहिम ने सामाजिक नियंत्रण को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष के रूप में विभाजित किया है। प्राचीन समाज, प्राथमिक समूहों और जनजातीय समाजों में प्रत्यक्ष सामाजिक नियंत्रण पाया जाता है और यह नियंत्रण निकट के निवासी व्यक्तियों अथवा समूहों (जैसे परिवार, मित्र मंडली स्कूल, अध्यापक, पड़ोस आदि) द्वारा लगाया जाता है। अप्रत्यक्ष सामाजिक नियंत्रण द्वितीयक समूहों द्वारा आरोपित किया जाता है। इसमें नियंत्रण का स्रोत व्यक्ति से अत्यंत दूर होता है।
4) सकारात्मक और नकारात्मक सामाजिक नियंत्रण किम्बल यंग ने सामाजिक नियंत्रण को सकारात्मक और नकारात्मक के रूप में विभाजित किया है। सकारात्मक नियंत्रण के अंतर्गत सामाजिक और व्यक्तिगत पुरस्कार प्रशंसा उत्साहवर्धन आदि सम्मिलित होते हैं। इसके विपरीत राज्य समूह परिवार, जाति आदि किसी के भी सामाजिक दबाव द्वारा व्यक्ति के अनुचित कार्य करने पर जो दंड अथवा उपेक्षा का व्यवहार किया जाता है वह नकारात्मक सामाजिक नियंत्रण होता है।
5) संगठित असंगठित और सहज सामाजिक नियंत्रण
• गुरविध तथा मूरने सामाजिक नियंत्रण के इन तीनों प्रकारों को विवेचित किया है। संगठित नियंत्रण नियमबद्ध एवं सुपरिभाषित होता है। यह छोटी-बड़ी एजेंसियों एवं व्यापक नियमों द्वारा व्यक्तियों के व्यवहारों पर नियंत्रण लगता है जैसे विवाह, परिवार, स्कूल, दफ्तर आदि। असंगठित सामाजिक नियंत्रण के अंतर्गत संस्कार परंपराएँ जनरीतियाँ, सामाजिक मानदंड और सांस्कृतिक नियम सम्मिलित हैं। सहज सामाजिक नियंत्रण का आधार व्यक्ति का अनुभव एवं आवश्यकताएँ हैं जो व्यक्ति को किसी विशिष्ट प्रकार के कार्य की ओर उन्मुख करने का प्रयत्न करता है।
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