भारतीय समाज: ऐतिहासिक परिदृश्य - Indian Society: Historical Scenario

 भारतीय समाज: ऐतिहासिक परिदृश्य - Indian Society: Historical Scenario

भारतीय समाज प्राचीन काल में अत्यंत संगठित रूप में अवस्थित थे। यहाँ वर्ण एवं जाति व्यवस्था ने समाज के अनेक लोगों की प्रस्थितियाँ एवं भूमिकाओं को निश्चित कर संगठन को स्थायित्व प्रान करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रस्तुत किया। धर्म अर्थ, काम और मोक्ष चार पुरुषार्थों के आधार पर मानव जीवन को निर्देशित और नियंत्रित करने का प्रयत्न किया गया। आश्रम व्यवस्था ने लोगों को समाज का योग्य सदस्य बनने और संपूर्ण समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया। विभिन्न प्रयाओं, परंपराओं रीति-रिवाजों आदि ने व्यक्ति के व्यवहारों को उचित दिशा की ओर उन्मुख किया। समकालीन परिदृश्य में विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव आए हैं और विशेषतः प्रौद्योगिक परिवर्तनों, व्यक्तिवादिता और स्वार्थवादिता के विस्तार के परिणामस्वरूप भारतीय समाज में मौलिक मान्यताओं के प्रति एकमत्यता का हास हुआ है। विभिन्न परिवर्तनों के बावजूद भारतीय समाज आज भी पाश्चात्य समाजों की तुलना में अधिक दृढ़ और सफल है।


भारतीय समाज: ऐतिहासिक परिदृश्य


भारतीय समाज के साथ भारतवर्ष नाम जुड़ा हुआ है। इस संबंध में प्राचीन मत है कि यहाँ भरत' नामक एक प्रतापी राजा शासन किया करता था। उसी के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा। भारत को हिंदुस्तान या इंडिया के नाम से भी संबोधित किया जाता है। यह नाम इस देश के प्रारंभिक आक्रमणकारियों फारसियों व यूनानियों द्वारा दिया गया है। उन्होंने इस देश का नाम सिंधु या इंडस नदी के नाम पर सिंधु का प्रदेश रखा। फारसी 'स' अक्षर का उच्चारण 'ह' की भांति करते हैं, जिसके कारण इस देश का नाम हिंदुस्तान पढ़ा।


● भारत देश की लंबाई 3,214 किलोमीटर (कश्मीर से कन्याकुमारी तक) और चौड़ाई पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर तक 2,933 किलोमीटर है। यह महाद्रीय विश्व के क्षेत्रफल की दृष्टि से 40वा भाग है। भारत की स्थलीय सीमा की लंबाई 15,200 किलोमीटर एवं समुद्री सीमा से 7.516 किलोमीटर है। भौगोलिक दृष्टि से भारत को निम्न पाँच भागों में बांटा जा सकता है. 


• उत्तर का पर्वतीय प्रदेश


● उत्तरी भारत का बड़ा मैदान


• दक्षिण का पठारी प्रदेश


राजस्थान का मरस्थल


• समुद्र तट के मैदानान शांति मैत्री यदि भारत की जनसंख्यात्मक पृष्ठभूमि पर नजर डाले तो यह पता चलता है कि जहां 1901 में भारत की जनसंख्या 2,383 करोड़ थी, वहीं 1951 में यह 36.11 करोड़ 1991 में 84.39 करोड़ और 2001 में यह बढ़कर 102.87 करोड़ हो गई। इसमें पुरुषों की संख्या 53 22 करोड़ और महिलाओं की संख्या49.65 करोड़ थी। भारत में प्रति वर्ष 3.6 करोड़ बच्चों का जन्म तथा 0.87 करोड़ व्यक्तियों की मृत्यु होती है। इन आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि भारत की जनसंख्या प्रति वर्ष 2.13 करोड़ की दर से बढ़ रही है। भारत में मुख्य रूप से छह धर्म प्रचलित हैं, यथा हिंदू मुस्लिम सिक्ख, ईसाई, बौद्ध और जैन इन धर्मों के अतिरिक्त भी कुछ धर्म और धार्मिक विश्वासों का प्रचलन है, परंतु उसके अनुयायी मात्र 0.73 प्रतिशत ही हैं।

2001 की जनसंख्या के अनुसार हिंदू धर्म को मानने वालों की संख्या 82.75 करोड़ (80.5 प्रतिशत) है, इस्लाम धर्म के अनुयायियों की संख्या 13.81 करोड़ (13.4 प्रतिशत), ईसाई धर्म को मानने बालों की जनसंख्या 2.40 करोड़ क्या धर्म के अनुयायियों की संख्या 1.92 करोड़, बौद्ध धर्म को मानने वालों की संख्या 79.55 लाख और जैन धर्म के अनुयायियों की संख्या 42.25 करोड़ है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 1652 मातृभाषाएँ विद्यमान हैं, जिन्हें 826 भाषाओं के अंतर्गत लिया जा सकता है। इसमें से 103 भाषाएँ भारतीय मूल की नहीं हैं। इनमें से 15 भाषाएँ असमिया, उड़िया, उर्दू कन्नड कश्मीरी गुजराती, तमिल, तेलुगु बांग्ला पंजाबी, मराठी, संस्कृत, सिंधी, मलयालम और हिंदी सम्मिलित है। 20 अगस्त 1990 को तीन अन्य भाषाओं नेपाली मणिपुरी और कोंकणी को आठवीं अनुसूची के अंतर्गत स्थम दिया गया है। इनमें हिंदी भाषीयों की संख्या सबसे अधिक अर्थात 33.72 करोड़ है। इसके बाद बांग्ला भाषी 6.95 करोड़ और फिर तेलुगु भाषी 6.60 करोड़ हैं।