सामाजिक समस्याओं के लिए उत्तरदायी कारण - Reasons responsible for social problems

सामाजिक समस्याओं के लिए उत्तरदायी कारण - Reasons responsible for social problems

सामाजिक समस्याओं के लिएउत्तरदायी कारक सर्वथा अनेक होते हैं। सभी समाजों में उत्पन्न सामाजिक समस्याएं और प्रत्येक सामाजिक समस्याओं के लिए कारक अलगअलग होते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख कारकों का उल्लेख किया जा रहा है।


1. सामाजिक समस्याएँ मनुष्य के व्यवहार में परिवर्तन होने के कारण होता है। यदि व्यवहार सामाजिक मूल्यों व मानकों के विरुद्ध होने लगता है, तो इससे सामाजिक समस्याएँ पैदा होने लगती है। 


2. सामाजिक परिवर्तन की तेज गतिशीलता के कारण प्रायः सामाजिक समस्याएं जन्म लेने लगती है। इसके पीछे कारण यह है कि अनेक बार मनुष्य नवीन परिस्थितियों से अनुकूलन कर पाने में असमर्थ होता है। 


3. सामान्य तौर पर सामाजिक समस्या का मूल कारण आर्थिक होता है।


4. पारसन्स ने मनुष्य के भौतिक साधनों के साथ अपूर्ण समायोजन को सामाजिक समस्याओं की उत्पत्ति के लिए महत्वपूर्ण माना है।


 5. बोल्फ का मानना है कि सामाजिक समस्या का मूल कारण जनसंख्या वृद्धि है।


6. इलियट और मरिल द्वारा सामाजिक समस्याओं का मूल सामाजिक विघटन को माना है।


रेनहार्ट ने सामाजिक समस्याओं के विकास के लिए आवश्यक तत्वों की चर्चा की है जो इस प्रकार है।


1. स्वार्थों और क्रियाओं का विभेदीकरण तथा गुण यह तत्व उस सिद्धांत पर आधारित है, जो इस बात को मान्यता प्रदान करता है कि जिस मशीन अथवा जीवित प्राणी के पास जीतने अधिक भाग होते हैं, उन भागों में असंतुलन की संभावना उतनी ही अधिक रहती है। ठीक यही मान्यता मानव पर भी लागू होती है। अर्थात जहाँ अनेक व्यक्तियों समुदायों, संस्थाओं अथवा व्यवस्थाओं के स्वार्थ में टकराव की स्थिति अधिक मात्रा में रहती है वहाँ सामाजिक समस्याओं के उत्पन्न होने के अवसर अधिक रहते हैं। 


2. सामाजिक परिवर्तन और सभ्यता के विकास की आवृत्ति को तेज करना यह वैज्ञानिक और मशीनी नवाचारों की अधिकता के कारण संभव हो पाया है। मशीनों के नवाचार ने कई पुराने रोजगारों को नष्ट कर दिया और इसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों ने प्रवास किया तथा इसने वर्गों में संघर्ष को जन्म दिया।


3. वैज्ञानिक विश्लेषण करने की मानव की विकसित अंतर्दृष्टि जब से मानव द्वारा प्रकृति की गतिविधियों के अध्ययन के लिए सामाजिक अंतर्दृष्टि विकसित की गई है और इसके परिणामस्वरूप पूर्व के साधारण समझे जाने वाली स्थितियों को मानव जीवन और समाज को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक कारकों के रूप में समझा जाने लगा है।