द्वितीयक समूह - Secondary Group
द्वितीयक समूह - Secondary Group
कूले ने अपनी दूसरी कृति 'Introductory Sociology' में द्वितीयक समूह का वर्णन किया है। व्यक्ति अपनी अधिकतर आवश्यकताओं की पूर्ति द्वितीयक समूह में ही करता है। ऐसे समूहों में भावनात्मकता उष्णता पनिष्ठता का अभाव होता है। इस प्रकार के समूह आपस में मात्र स्वार्थवश एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। उदाहरणस्वरूप कार्यालय के सहकर्मी, कॉलेज मित्र आदि। द्वितीयक समूह की निम्न विशेषताएँ होती है
1) बृहत आकार
2) अवैयक्तिक तथा अस्थाई संबंध
3) पारस्परिक निर्भरता
4) ऐच्छिक सदस्यता
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