राज्य की संकल्पना और अर्थ - Concept and Meaning of the State

राज्य की संकल्पना और अर्थ - Concept and Meaning of the State

राष्ट्र एक विशिष्ट प्रकार का समुदाय होता है, एक ऐसा समुदाय होता है जो किंचित सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहता है। समुदाय को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राष्ट्रराज्य एक शासन व्यवस्था का निर्धारण करता है और अपनी शक्ति और सत्ता के आधार पर व्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करता है। राष्ट्रवाद एक प्रकार की भावना होती है जो भावनात्मक एकता से फलित होती है और से राष्ट्र राज्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होती है।


राज्य की संकल्पना और अर्थ

राष्ट्र अंग्रेजी शब्द 'स्टेट' का हिंदी रूपांतरण है और वह शब्द लैटिन भाषा के स्टेट्स से बना है, जिसका तात्पर्य स्तर' अथवा 'स्थिति' अथवा किसी तथ्य का होना होता है। मूल रूप से राज्य उस संगठित इकाई को कहते हैं जो एक शासन अथवा सरकार के अधीन हो। राज्य संप्रभुता संपन्न हो सकते है। इसके अलावा किसी शासकीय इकाई या उसके किसी प्रभाग को भी राज्य की संज्ञा दी जाती है। मैकियावली ने सबसे पहले 16वीं शताब्दी के आरंभ में स्टेट (राष्ट्र) शब्द का प्रयोग किया और उसके अनुसार यह एक ऐसी शक्ति है जो मनुष्य के ऊपर सत्ता स्थापित करती है। मैक्स वेबर ने राज्य की संवैधानिक परिभाषा प्रस्तुत की। उनके अनुसार राज्य एक प्रकार का मानव समुदाय है जो निर्दिष्ट भू भाग में भौतिक बल के विधिसम्मत प्रयोग के एकाधिकार का दावा रखता है।"


मैकाइबर और पेज के अनुसार, राज्य को अन्य सभी संस्थाओं से इस आधार पर अलग पहचाना जा सकता है कि केवल इसी में बल प्रयोग की अंतिम शक्ति निहित है।"


थॉमस हाब्स के अनुसार, मनुष्यों की अपनी स्वयं की रक्षा तथा इसके द्वारा एक अत्यधिक संतुष्ट जीवन जीने की दूरदर्शिता ही राज्य की उत्पत्ति का अंतिम कारण है। ग्रीन कहते हैं, "राज्य लोगों का वह समूह है जो एक-दूसरे को उनके पास निहित अधिकारों के कारण पहचान देते हैं तथा जो उन अधिकारों की रक्षा व उन्हें बनाए रखने के लिए संस्थाओं की व्यवस्था करते हैं।"


जॉन हाफमैन तथा पॉल ब्राह्म ने राष्ट्र राज्य के निम्न लक्षणों का उल्लेख किया है


1. राज्य एक सार्वजनिक संस्था है. जिसकी प्रकृति समाज की अनेक निजी गतिविधियों से अलग होती है।


2. राज्य अपने क्षेत्र के निवासियों पर कानून लागू करता है और उन पर उसे मानने हेतु शक्ति का प्रयोग करता है।


3. राज्य के पास ही संप्रभुता होती है और यह सरकार द्वारा संचालित होती है।


4. राज्य अपने अधीन जनता से कर जुटाने की क्षमता रखता है।


5. राज्य के कर्मचारियों की नियुक्ति उनके कौशल और योग्यता के आधार पर होती है।


राष्ट्र राज्य को उससे संबंधित अनेक संकल्पनाओं से पृथक रखना चाहिए। राज्य सरकार नहीं होता है से सरकार तो मात्र राज्य की वास्तविकता का ठोस रूप होती है। यह प्रभु सत्ता संपन्न होती है भले ही उसकी संप्रभुता का इस्तेमाल सरकार इरा हो। राज्य न ही समाज है और न ही जन-समुदार राज्य तो एक कानूनी संस्था है।