पारिवारिक विघटन - Family Disintegration

पारिवारिक विघटन - Family Disintegration

समकालीन समय संक्रमणकालीन अवस्था से गुजर रहा है। समाज में कई सारे परिवर्तन हो रहे हैं और कुछ परिवर्तन होने को तैयार हैं। औद्योगीकरण, नगरीकरण, आधुनिकीकरण, भूमंडलीकरण जनसंख्या वृद्धि तकनीकी क्षेत्र के नवीन आविष्कारों, जीवन स्तर में परिवर्तन, प्रौद्योगिक विकास आदि के कारण समाज तेजी से बदल रहा है और सामाजिक संरचनाओं में भी बदलाव आ रहे हैं। इन बदलावों ने समाज में कई समस्याओं को जन्म दिया है। इन समस्याओं का संबंध परिवार व्यवस्था से भी है। इस इकाई में परिवार व्यवस्था की समकालीन समस्याओं के बारे में विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है।


पारिवारिक विघटन


पारिवारिक विघटन, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है का अर्थ है परिवार का टूटना। स्नेह, सहयोग, प्रेम आदि परिवार के तत्व होते हैं जो परिवार को एक संगठित इकाई के रूप में बांधे रहते हैं। इन तत्वों में बिखराव ही पारिवारिक विघटन को स्पष्ट करता है। इलियट और मैरिल के शब्दों में, "व्यापक अर्थों में पारिवारिक विघटन को विभिन्न प्रकार के परिवारों में से किसी परिवार की क्रियाशीलता के रूप में जाना जा सकता है। इस प्रकार पारिवारिक विघटन में केवल पति-पत्नी के मध्य पाया जाने वाला तनाव ही नहीं आता है, अपितु बच्चों और माता-पिता के मध्य पनपने वाला तनाव भी आता है। एक प्रकार्यात्मक इकाई के रूप में पारिवारिक अस्तित्व अनेक व्यक्तिगत संबंधों की निरंतरता पर निर्भर करता है। ये संबंध पारस्परिक होते हैं। प्रत्येक सदस्य दूसरे के साथ सहयोगात्मक भूमिका निभाता है। इन समूह सदस्यों का टूटना ही पारिवारिक विघटन कहलाता है।" यहाँ पारिवारिक विघटन के उन कारणों पर विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है, जो सार्वभौमिक तौर पर उल्लेखनीय है।


1. सामाजिक मूल्यों की विभिन्नता


सामाजिक मूल्य में विविधता पारिवारिक विघटन को बढ़ावा देते हैं। यदि माता-पिता और बच्चों के मूल्य विचार और आदर्श एक जैसे नहीं हुए अर्थात उनमें विविधता रही तो पारिवारिक विघटन होना स्वाभाविक है। सामान्य तौर पर माता-पिता पुराने मूल्यों को प्राथमिकता देते हैं और बच्चों द्वारा नवीन मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रकार पारिवारिक विघटन का खतरा बना रहता है। मूल्यों की विभिन्नता के कारण पति-पत्नी में विवाद भी होते हैं। 


2. सामाजिक संरचना में परिवर्तन


सामाजिक संरचना द्वारा ही समाज में व्यक्ति की भूमिका और प्रस्थिति का निर्धारण होता है। वर्तमान समय के परिवर्तनों के कारण सामाजिक संरचनाओं में काफी बदलाव हुए हैं। आज पारिवारिक सदस्य यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि परिवार में उनकी भूमिकाएँ क्या है? सदस्य अपनी भूमिकाओं का समायोजन नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण से भी पारिवारिक विघटन की दशा उत्पन्न होने लगी है। 


3. व्यक्तिवादी और भौतिकवादी वैचारिकी


वैचारिकी के ये दोनों ढंग मनुष्य को स्वार्थी बनाते हैं। जैसा कि पहले भी बताया जा चुका है कि परिवार में सहयोग, प्रेम, स्नेह, परोपकारिता आदि तत्व आवश्यक होते हैं, परंतु व्यक्तिवादी और भौतिकवादी होने के कारण सदस्य परिवार के लिए अपनी भूमिकाओं का निष्पादन उचित तरीके से नहीं कर पाते हैं। वह स्वयं के बारे में ही सोचता है, उसे दूसरों के हित अहित से कोई फर्क नहीं पड़ता। फलतः परिवार विघटित होने लगता है।


4. औद्योगीकरण और नगरीकरण


औद्योगीकरण और नगरीकरण ने पारिवारिक विघटन में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। औद्योगिक क्रांति के पूर्व सभी उत्पादन और उपभोग का केंद्र परिवार हुआ करता था परंतु औद्योगिक विकास के पश्चात परिवार के बहुत से कार्यों को अन्य समितियों द्वारा छीन लिया गया। औद्योगीकरण और नगरीकरण दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और एकदूसरे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सुविधाओं और नौकरी की आशा में लोग पलायन करने लगे हैं जिससे परिवार पर नियंत्रण कमजोर हो रहा है। स्त्रियों की भूमिकाओं में काफ़ी परिवर्तन आए हैं। इन परिस्थितियों के कारण परिवार विघटित हो रहे हैं। 


5. निर्धनता


यदि पारिवारिक आय सीमित है तो निर्धनता पारिवारिक विघटन के लिए उत्तरदायी कारक है। धन के अभाव में बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी नहीं हो पाती हैं जिसके कारण परिवार में द्वेष, संघर्ष, क्लेश, कटुता आदि का वातावरण बना रहता है। 


6. वैवाहिक आधार में परिवर्तन


पहले के समय में विवाह को अटूट संबंध के रूप में विश्लेषित किया जाता था परंतु आज के समय में वैवाहिक संबंध को दैवीय इच्छा न मानकर मानवीय इच्छा के अनुरूप तोड़ा भी जा सकता है। इसके अलावा परिवार द्वारा किए जाने वाले व्यवस्थित विवाहों की तुलना में बस्बधू द्वारा तय किए जाने बाले विवाह की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोतरी होती जा रही है। आज प्रेम विवाह का चलन तेज हो रहा

है और कुछ समय बीत जाने के बाद धीर-धरि प्रेम समाप्त हो जाता है तो परिवार विघटित होने लगते


7. यौन संबंधों की असंतुष्टि


वर्तमान समय में परिवार में होने वाले अधिकतर विपटन यौन संबंधों की असंतुष्टि के कारण होते हैं। यदि पति-पत्नी में एक-दूसरे के प्रति विश्वास की कमी है अथवा वे वैवाहिक दायरे से बाहर बौन इच्छाओं की पूर्ति करते हैं तो इन परिस्थितियों में दंपत्ति एकदूसरे के प्रति घृणा द्वेष आदि की भावना रखने लगते हैं। फलतः परिवार विघटित हो जाता है। 


8. अन्य कारक


मनोरंजन के व्यापारीकरण हो जाने के कारण परिवार के कर्तव्य और जवाबदेही अपेक्षाकृत कम हो चुकी है। साथ ही आधुनिक समय में धर्म से लोगों की आस्था कम हो जाने के कारण भी परिवार का संगठन कमजोर होता जा रहा है। इसके साथ ही पति-पत्नी के व्यक्तिगत दोष के कारण भी पारिवारिक विघटन होते हैं।