राष्ट्र राज्य के मूल तत्व - Fundamentals of Nation State
राष्ट्र राज्य के मूल तत्व - Fundamentals of Nation State
जब राज्य को एक विशिष्ट संगठन के रूप में मान्यता प्रदान की जाती है तब यह आवश्यक होता है कि जनसंख्या उसके मूलतत्वों के बारे में विवेचना की जाए।
किसी भी संस्था के लिए मूल तत्व मनुष्यों का समूह होता है। राज्य एक ऐसी संस्था है जिसमें अनेक मनुष्य एकता के सूत्र में बंधे हुए होते हैं। राज्य में जनसंख्या की कोई नियत संख्या नहीं निर्धारित है परंतु इसमें उतनी जनसंख्या निहित होनी चाहिए जो जीवन के विविध पक्षों की देखरेख कर सके। किसी भी राज्य की जनसंख्या के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह एक ही जाति, धर्म, भाषा, संप्रदाय या संस्कृति से संबंधित हो, परंतु एक ही राज्य से संबंधित होने के कारण उनकी निष्ठा का केंद्र एक ही होना आवश्यक है।
भू-भाग
राज्य के अस्तित्व के लिए आवश्यक है कि उसका एक निश्चित भू-भाग हो, जिसमें उसकी जनसंख्या निवास करती हो और इससे उसकी सत्ता निर्विवाद रूप से स्थापित हो सकती है। यदि किसी एक भू-भाग पर एक से अधिक राज्य अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं तो उसके लिए उनके या तो संघर्ष होता है अथवा समझौता क्योंकि किसी राज्य के दूसरे राज्य के भूभाग में रहने कि कोई गुंजाइश नहीं होती। जनसंख्या के ही समान किसी राज्य के भू-भाग की कोई निश्चित रूपरेखा तैयार नहीं की जा सकती कि वह भू-भाग आकार में कितना बड़ा होना चाहिए। वह भू-भाग इतना विस्तृत होना चाहिए जीतने में राज्य की पूरी जनसंख्या कम से कम वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सके।
सरकार
उक्त वर्णित राज्य के दो मूलतत्वों को प्रबंधकीय ढंग से सुचारू रूप से संचालित रखने के लिए सरकार की आवश्यकता होती है जो राज्य की सेवाओं को जनसंख्या तक पहुंचा सके राज्य के भू-भाग की सुरक्षा कर सके, राज्य के भीता व्यवस्था और नैतिकता बनाए रखे, अन्य राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार बनाए रखे और वित्तीय प्रबंधन को बनाए रखे। समकालीन परिप्रेक्ष्य में सरकार द्वारा जनता के लिए विविध प्रकार के कार्य किए जाते हैं, यथा- शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, रोजगार, संचार, मनोरंजन परिवहन आदि। इन अनेक प्रकार के प्रबंधन के कारण ही आज अराज्य से संबंधित एक नयी संकल्पना का जन्म हुआ है कल्याणकारी राज्य
प्रभुसत्ता
उक्त वर्णित सरकार द्वारा कार्य (नियंत्रण प्रबंधन संचालन आदि) सुचारू रूप से क्रियान्वित होने के लिए एक प्रकार की शक्ति अथवा सत्ता की आवश्यकता होती है जो कि वैधानिक हो, प्रभुसत्ता वही शक्ति है। यह वह शक्ति है, जिसकी सहायता से राज्य अपने भू-भाग पर अवस्थित जनसंख्या से अपने आदेशों, कानूनों आदि का पालन करा सके और क्षेत्र में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रख सकेा अन्य संस्थाएं आवश्यकता पर आधारित होती हैं और उनकी सदस्यता ऐच्छिक होता है, परंतु राज्य एक ऐसी संस्था है, जिसकी सदस्यता अनिवार्य होती है और उसके नियमों की अवहेलना करने पर दंडित होने का भय रहता है।
राष्ट्र राज्य का उदय और विकास
आधुनिक परिप्रेक्ष्य में राज्य और राष्ट्र प्रायः एक से हो गए हैं। राज्य की सीमाओं को राष्ट्र की सीमाएं माना जा रहा है, राज्य के हित को राष्ट्रहित का संबोधित किया जा रहा है और विभिन्न राज्यों के संबंधों को अंतरराष्ट्रीय संबंध की संज्ञादी जा रही है। राष्ट्र राज्य में वहाँ के भू-भाग पर निवास करते सभी लोग आ जाते हैं (चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, भाषा, संप्रदाय अथवा संकृति से संबंधित हो जो एक केंद्रीय सत्ता के प्रति निष्ठावान हो और एक सामान्य हित, सामान्य इतिहास और सामान्य जीवन के प्रति सजग हो। राष्ट्र राज्य के विकास को निम्न अवस्थाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जा सकता है.
कबीला राज्य
राज्य के आदिम स्वरूप छोटे-छोटे बोले हुआ करते थे और उसमें एक सरदार होता था, जिसकी सत्ता को क्षेत्र के सभी लोगों द्वारा मान्य होती थी। ये कबीले स्वजन समूहों पर आधारित होते थे और सरदार की सहायता हेतु परामर्श सभा का प्रचलन घाई ये कबीले जाती धर्म आर्थिक हितों के आधार पर संगठित होकर रहा करते थे और शत्रुओं से मुकाबला करते थे। आस्ट्रेलिया के आदिवासी कबीलों में इस प्रकार के संगठन देखने को मिलते हैं। कुछ इस प्रकार के भी कबीले में जो खानाबदोशी जीवन व्यतीत किया करते थे, जिन्हें राज्य की परिधि में नहीं लिया जा सकता।
पूर्वी साम्राज्य
नदी आदि पार्टियों में प्राणांति मैत्री जब नील नदी, गंगा नदी आदि पाटियों में प्रारंभिक सभ्यता का विकास हुआ तो वह इस प्रकार के शहरों का निर्माण हुआ। इन स्तनों पर भिन्न-भिन्न स्वजन समूहों के लोग आकार मिलने लगे और इन्होंने युद्ध कला में निपुणता प्राप्त करके अन्य क्षेत्रों को अपने अधीन कर लिया। इस श्रेणी में प्राचीन मिश्र, भारत, चीन, सीरिया के साम्राज्य आते हैं।
यूनानी नगरराज्य
पर्वतों, घने जंगलों और समुद्रों ने भूमि को अनेक भागों में बांट दिया था जिनमें शासन करना अपेक्षाकृत सरल था और यही इस प्रकार के राज्यों का उदय हुआ। यहा छोटे-छोटे नगर-राज्य होने के कारण शक्तिशाली निर्विवाद शासन क्रियाशील नहीं हो पाये और वे मिल-जुलकर शासन करते थे।
रोमन साम्राज्य
जब आंतरिक संघर्ष और आक्रमणों से यूनानी राज्य नष्ट हो गए तब यूरोप में रोम की सभ्यता का उदय होता है। पर्वतीय लोगों पर आधिपत्य स्थापित करके रोमन लोगों ने उन्हें अपने साथ मिला लिया और अलग-अलग धर्मों, जातियों, संस्कृतियों के अनुयायीओं पर एक साथ संयुक्त रूप से शासन करने हेतु एक विस्तृत शासन प्रणाली का विकास हुआ। सम्राट की शक्ति को धर्म की आड़ में एक स्वतंत्र और सर्वशक्तिमान सत्ता के रूप में वैधता दी जाने लगी।
सामंती राज्य
रोमन साम्राज्य के पाटन के पश्चात केंद्रीय सत्ता का लोप हो गया। मध्य काल में सारी शक्तियाँ जमीदारों, सामंतों और जागीरदारों तक ही सिमट कर रह गई। हालांकि छोटेछोटे राज्यों में राजा की सत्ता ही सर्वोच्च थी. परंतु संपूर्ण शक्ति पर आधिपत्य सामंतों के पास ही होता था। जन साधारण दासों के रूप में जमीदारों के अधीन जीवन यापन करने लगे। सामतों जमींदारों के अलावा कुछ स्थानों पर पोप की सत्ता भी स्थापित थी। 14वीं शताब्दियों तक आते आते पोप, जमींदारों आदि द्वारा अपनी शक्तियों के दुरुपयोग
किए जाने के कारण पुनः राजतंत्र का उभार होता है।
आधुनिक राष्ट्र राज्य
15वीं और 16वीं शताब्दी में यूरोप में सबसे पहले राष्ट्र राज्यों का उदय हुआ। मनुष्य नवीन आर्थिक संबंध राष्ट्रीयता, संस्कृति, भाषा, एकता आदि के विचार के साथ स्थायी समूहों के रूप में संगठित हुए। आरंभ में सत्ता का केंद्र राजा अथवा सम्राट हुआ करता था और सारी शक्तियां उसी के पास होती थी। 18वीं शताब्दों से यूरोप में संवैधानिक शासन का उदय होता है। इंग्लैंड में यह शांतिपूर्ण तरीके से होता है तो वहीं फ्रांस में क्रांति के पश्चात इसका उदय होता है। 8वाँ और 19वीं शताब्दी में यूरोप के प्रमुख राष्ट्रों ने राष्ट्रीय आर्थिक सुद्दता के लिए उपनिवेशवाद को अपनाया और विभिन्न क्षेत्रों को अपने अधीन कर लिया। दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात 20वीं शताब्दी के मध्य में उपनिवेशवाद का पतन होता है। फलस्वरूप कई नए राष्ट्र राज्यों का उदय हुआ और उन्हें विभिन्न प्रकार की राजनीतिक आर्थिक विकास की गंभीर समस्याओं से गुजरना पड़ा उनमें से भारत ही एक मात्र ऐसा राष्ट्रराज्य है, जिसमें लगातार लोकतंत्र की व्यवस्था बनी रही है।
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