वैवाहिक समस्याएं - Matrimonial Problems

वैवाहिक समस्याएं - Matrimonial Problems


वैवाहिक संबंधों की निर्मिति इसी आशा के साथ होती है कि ये संबंध सदा के लिए संबद्ध हो रहे हैं। उनमें सहयोग, प्रेम, स्नेह, आत्मीयता, एक-दूसरे के लिए त्याग, साझेदारी विश्वास आदि की भावनाएँ निहित होनी चाहिए। यह विश्वास किया जाता है कि विवाह एक ईश्वरीय इच्छा है और इसका उल्लंघन करना अनुचित है। कहा जाता है कि विवाह जन्म-जन्मांतर का संबंध होता है और इसका निर्वहन उचित तरीके से किया जाना चाहिए) दंपत्ति अपना वैवाहिक जीवन इस आशा और प्रतिबद्धता के साथ आरंभ करते हैकि यदि उन्हें किसी भी परेशानी का सामना करना पड़े तो वे उसका सामना साथ मिलकर करेंगे। वे इस बात के लिए अशक्त होते हैं कि सुख-दुख हानि-लाभ आदि में वे एक दूसरे का साथ देंगे।


परंतु आधुनिक समय में परिस्थितियाँ बहुत तेजी से बदल रही है, जिसके कारण परिवार व्यवस्था में विवाह से संबंधित कई समस्याएँ उजागर होने लगी है। जीवन के तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होने के कारण अनेक समस्याएँ सामने आने लगी हैं। तलाक की बढ़ती दर के आधार पर यह कहा जा सकता है कि वर्तमान समय में वैवाहिक समस्याओं में बढ़ोत्तरी हो रही है। तलाक के पीछे कई कारक हो सकते हैं, यथा- दुर्व्यवहार, हिंसा, दहेज, नशाखोरी, पारिवारिक कलह आदि। सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन हो रहे हैं और परिवारवाद, समष्टिवाद के स्थान पर व्यक्तिवादिता की भावना का बोलबाला हो रहा है। लोग कई मायनों में अपने आदेशों को बदला रहे है और स्वयं को अन्य सदस्यों की तुलना में सर्वोपरि मानते हैं स्वयं के हित साधने के लिए ये पारिवारिक भावनाओं को भी आहत करने से भी नहीं चूकते।


अकेलापन संतानहीनता, विवाह पूर्व और विवाह के पश्चात यौन संबंधों का प्रचलन आम होता जा रहा है जबकि दूसरी ओर तलाक के आकड़े भी तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले सामाजिक मानदंड निषेध और नियम इतने कठोर हुआ करते थे कि पारिवारिक समस्याओं को भी व्यक्ति नजरंदाज कर देते थे और सहयोग तथा स्नेह को बनाए रखने पर और देते थे, परंतु आज के समय में ये मानदंड कमजोर हो चुके हैं रण तलाक की घटनाएँ सामने आने लगी है।


समस्याग्रस्त लोगों में यह पाया गया है कि उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लगातार खराब रहता है। वैवाहिक समस्याओं अथवा तलाक के कारण लोग तनाव में रहने लगते हैं और इसके कारण उनके परिवार के अन्य लोगों के साथ संबंध भी बिगड़ने लगते हैं। पति-पत्नी के मध्य के तनाव के कारण उनके संबंध सास, ससुर बहन/ननद भाई/देवर आदि के साथ असंतुलित हो जाते हैं। इस कारण से परिवार की व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ता है। शोध से यह बात स्पष्ट होती है कि वैवाहिक समस्याओं के कारण सिरदर्द, अस्थमा जोड़ों का दर्द, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के होने की संभावनाएं तेज हो जाती है। इसके अलावा इससे वैवाहिक तनाव से निराशा, दुखिता संदेह आदि जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है, जिससे व्यक्ति मनोवैज्ञानिक तौर पर अस्वस्थ हो जाता है। तलाक और वैवाहिक समस्याओं के वातावरण का पूरे परिवार पर बुरा असर पड़ता है बच्चे बिगड़ जाते हैं और विसंगत कार्यों में लग जाते हैं।

वैवाहिक समस्याओं का बुरा असर समाज और सामाजिक प्रस्थिति पर भी पड़ता है। संबंधित परिवार समाज से अलग-थलग पड़ जाता है, मित्रों के व्यवहार परिवर्तित हो जाते हैं। तलाक के कारण आर्थिक तंगी संबंधित समस्या भी उत्पन्न होती है। यह समस्या खासकर महिलाओं के लिए ज्यादा गंभीर होती है। उनका भरण-पोषण करना दुष्कर हो जाता है संतान के जीवन स्तर में गिरावट आने लगती है इससे बच्चों का सामाजीकरण पूर्णरूपेण बाधित हो जाता है।