परिवार में हिंसा और दुर्व्यवहार - Violence and Abuse in the Family

परिवार में हिंसा और दुर्व्यवहार - Violence and Abuse in the Family

परिवार की व्याख्या स्नेह, प्रेम, सहयोग, परोपकार, आत्मीयता जैसे भावों के संदर्भ में की जाती है। तथापि परिवार में शोषण, हिंसा, दुर्व्यवहार उपेक्षा आदि भी निहित रहने वाले भाव होते हैं और इन्हें नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। पारंपरिक समय में भी महिलाओं और बच्चों को हिंसा और दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ता था। महिलाओं को तो आरंभ से ही पुरुषों के अधीन रहने की शिक्षा दी जाती है। इस संबंध में किए गए कई शोधों से यह पता चलता है कि घरेलू हिंसा से पीड़ित होने के बावजूद महिलाएं कभी पुलिस महिला आयोग अथवा किसी अन्य मदद का प्रयास नहीं करती हैं। ऐसा इसलिए हैं, क्योंकि पति द्वारा मारा-पीटा जाना, धक्का देना आदि अवधारणात्मक तौर पर हिंसा नहीं माना जाता है, यह एक सामान्य घटना है।

अधिकतर महिलाएं समाज में बदनामी के डर से हिंसा की घटनाओं को छिपाती हैं। पारंपरिक धार्मिक साहित्या में भी महिलाओं के विरुद्ध की जाने वाली हिंसा का सामाजिक नहीं माना है। इसी तरह से बच्चों को भी मारना, गाली देना, धक्का देना, भोजन न देना आदि अनुशासन में रखने के तरीकों में माने जाते हैं। बहुत से परिजन तो यह मानते हैं कि यदि बच्चे को मारा-पीटा न जाए, तो वे बिगड़ जाते हैं और सदैव के लिए असामाजिक व्यवहार करने लगते हैं। कुछ इसी प्रकार का रवैया शिक्षकों का भी होता है। वे बच्चों को मार-पीट कर शिक्षित करने में विश्वास करते हैं।


पारिवारिक व्यवस्था में समकालीन समस्याओं के बारे में विवरण प्रस्तुत किया गया है। परिवार व्यवस्था में पारिवारिक समस्याएं, शारीरिक समस्याएं, आर्थिक समस्याएँ हिंसा और दुर्व्यवहार आदि प्रकार की प्रमुख समस्याएँ निहित रहती हैं। इनके बारे में भी इस इकाई में विवेचन प्रस्तुत किया गया है।