णत्व-विधान

णत्व-विधान

जहाँ न का परिस्थितिवश ण हो जाता है उसे गत्व विधान कहते हैं । 


९. रमाभ्यास नो णः समानपदे- यदि एक ही पद में और के बाद न आये तो उसका णू हो जाता है जैसे रामेण, रामाणाम् आदि में गतव हुआ पर देवेन, देवानाम् आदि में नहीं। 


२. अदकुष्याहू नुमुव्यवायेऽपिर और यू के बाद किन्तु न से पहले यदि कोई स्वर वर्ण, कवर्ग, पवर्ग, आ, मुम्, ह, य, व, र, में से कोई वर्ण आता हो तो भी न का ण होता है। जैसे-रामेण, हरिणा, सर्पण, दर्पेण, ग्रहेण, सर्वेण आदि । 


३. र और प् के बाद किन्तु न से पूर्व यदि चवर्ग, टवर्ग, तवर्गा तथा ल श स में से कोई वर्ण आये तो न् का णू नहीं होता है। जैसे-सरलेन, गरलेन, पर्वतेन, विशारदेन आदि । 


४. न पदान्तस्य पदान्त-न का ण नहीं होता है। जैसे-रामान्, भ्रातृन्, नरान् । 


५. पदान्तरऽपि न भिन्न पद में रहने पर भी णत्व नहीं होता । जैसे-त्रिनेत्रः । गिरिनदी ।