अतिरिक्त सन्धि (पाणिनीय सूत्रानुसार)

 अतिरिक्त सन्धि (पाणिनीय सूत्रानुसार)


 पूर्वरूप-सन्धि (एड: पदान्तादति)


यह अयादि सन्धि का अपवाद है। यदि पद के अन्त में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद 'अ' हो तो उस 'अ' का लोप हो जाता है। उसके स्थान पर '5' चिह्न लगा दिया जाता है। जैसे रामे + अपि = रामेऽपि प्रभो अत्र प्रभो, कः अयम् कोऽयम् । सः अवदत् सोऽवदत् ।


प्रगृह्य-सन्धि  (इंदूदेद् द्विवचन प्रगृह्यम्)


इसे प्रकृतिभाव सन्धि भी कहते हैं। इंकारान्त, ऊकारान्त या एकारान्त शब्द यदि द्विवचन रहता है तो कोई सन्धि नहीं होती है। जैसे-मुनी आगच्छत: मुनी आगच्छतः। साधू इसौ साधू इमौ (यण् सन्धि का निषेध), लते एते लते एते, सविते एतौ सविते + एतौ (अयादि-सन्धि का निषेध) । 


पररूप-सन्धि (एडि पररूपम् ) 

उपसर्ग के आकार के बाद यदि धातु का 'ए' अथवा 'ओ' रहे तो उपसर्ग का आकार भी बाद के स्वर का रूप ले लेता है। यह वृद्धि सन्धि का अपवाद है। जैसे


 प्र + एषयति = प्रेषयति 

प्र + एजते = प्रेजते

उप + ओषति = उपोषति ।