फ्रांसीसी क्रांति के कारण - Cause of French Revolution
फ्रांसीसी क्रांति के कारण - Cause of French Revolution
यह वैज्ञानिक सत्य है कि हर घटना के पीछे कोई न कोई कारण आवश्य होता है। यह बात फ्रांसीसी क्रांति के लिए भी पूर्णतया सत्य है। फ्रांसीसी क्रांति की यह घटना अचानक नहीं घटित हुई, इसकी पृष्ठभूमि में फ्रांस में दीर्घकाल से ऐसी दशाए बनी जिन्हानें ने प्रत्यक्ष रूप से फ्रांसीसी क्रांति में योगदान दिया। 18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज में गहरा अंसतोष व्याप्त था। जनता राजा के निरंकुश और भ्रष्ट व्यवहार से त्रस्त थी। सामन्तों के विशेषाधिकार एवं अत्याचार से जनता प्रताड़ित थी। इन सब के कारण फ्रांस की जनता में व्याप्त अंसतोष का चरम फ्रांसीसी क्रांति के रूप में सामने आया। फ्रांस के इस क्रांति के प्रमुख कारणों को के निम्नलिखित रूप में देखा जा सकता है।
1. राजनीतिक कारण - फ्रांस में बूर्बो वंश द्वारा शासित निरंकुश राजतंत्र था। लुई 14वें के शासन काल में राजतंत्र की निरंकुशता चरम पर पहुच गयी। लुई 14वॉ कहता था कि “मै ही राज्य हूँ" यह सदैव युद्ध में व्यस्त रहा जिसके कारण इसके शासन काल में फ्रांस को बहुत आर्थिक क्षति हुई। इसके बाद लुई 15वॉ फ्रांस का शासक बना जो अत्यन्त निष्क्रिय, अयोग्य एवं विलासी था। जिसका कथन “मेरे बाद प्रलय" अत्यन्त प्रचलित हुआ जिससे स्पष्ट होता है कि इसको फ्रांस की स्थिति के बारे पूर्व आभास था। । लुई 15वॉ के बाद लुई 16वॉ सिंहासन पर बैठा उस समय फ्रांस के राजतंत्र की स्थिति अत्यन्त दयनीय हो चुकी थी। इसने स्थिति में सुधार करने के बजाय ऋण लेकर शासन चलाना आरम्भ कर दिया जिसके कारण फ्रांस में अराजकता तेजी से बढ़ने लगी। प्रशासन व्यवस्था में उच्च पदो पर उन लोगों को नियुक्ति किये जाने लगा जिनमें कोई व्यक्तिगत योग्यता और कुशलता नही थी। इस समय प्रशासन व्यवस्था अत्यन्त पक्षपात पूर्ण हो गया। सामान्य जनता न्याय से वंचित होने लगी। लुई 16वाँ की पत्नी अपने खर्चीले एवं विलासी पूर्ण जीवन के लिए कुख्याति थी। एक बार फ्रांस की भूखी जनता उसके महल के सामने एकट्ठी होकर भोजन की मांग की तो रानी एनत्वानेत कहा कि यदि तुम्हारे पास ब्रेड नहीं है तो केक खा लो" रानी का प्रशासन में आवश्कता से अधिक हस्ताक्षेप राजतंत्र के लिए घातक साबित हुआ।
2. सामाजिक कारण - फ्रांस की क्रांति का प्रमुख कारण फ्रांस में व्याप्त सामाजिक असामनता थी। फ्रांस में यह सामाजिक असामनता उच्च वर्गो (पादरी, सामंत) को प्राप्त विशेषाधिकारों के कारण उत्पन्न हुई थी। उस समय फ्रांस में तीन वर्ग थे धर्माधिकारी, सामंत, और साधारण जनता धर्माधिकारी और सामंत उच्च वर्ग के अर्न्तगत आते थे। राज्य के उच्च पदो पर इन्हीं का अधिकार था। ये फ्रांस की आबादी का मांत्र दो प्रतिशत थी। ज्यादातर कृषि भूमि के मालिक यही थे। ये भोग विलासपूर्ण जीवन व्यतीत करते थे। तीसरा वर्ग फ्रांस की बहुसंख्यक जनता का था जो कुल आबादी का 99 प्रतिशत थी। जिसके अर्न्तगत व्यापारी, शिक्षक, कृषक, श्रमिक आदि आते थे। राज्य के समस्त करों का भार इसी वर्ग पर था। इनकी स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। धर्माधिकारियों एवं सामन्तो के अत्याचारों से मुक्ति के लिए यह वर्ग क्रांति का प्रबल समर्थक बन गया।
3. आर्थिक कारण - लुई 16वाँ के शासनकाल तक फ्रांस की आर्थिक स्थिति अत्यन्त दयनीय हो गयी - थी। राज्य दिवालिया होने के कगार पर था लेकिन धर्माधिकारी एवं सामंत वर्ग आर्थिक रूप से सम्पन्न होने के बावजूद भी कर नही देता था। राज्य के राजस्व को भरने के लिए सामान्य वर्ग से तरह-तरह के कर वसूले जाते थे। इस प्रकार ‘कर प्रणाली' में व्याप्त असमानता फ्रांसीसी क्रांति का प्रमुख कारण बनी। साथ ही साथ फ्रांस की आर्थिक दुर्यव्यवस्था के लिए राजा, धर्माधिकारी और सामान्त वर्ग का अपव्यय एवं विलासिता पूर्ण जीवन शैली भी जिम्मेदार थी।
लुई14वें एवं 15 वें के शासन काल में फ्रास ने कई युद्ध लडे जिसके कारण फ्रांस की आर्थिक स्थिति अत्यन्त कमजोर हो गयी और राजकोश रिक्त हो गया। इस तरह फ्रासं की दयनीय आर्थिक स्थिति और इसकी क्षतिपूर्ति के लिए तृतीय वर्ग पर आवश्कता से अधिक कर का भार, शोषण एवं प्रताड़ना फ्रांसीसी क्रांति का कारण बनी।
4. धार्मिक कारण धर्माधिकारियों के भ्रष्ट आचरण और उनके विलासिता पूर्ण जीवनशैली के कारण फ्रांस की साधारण जनता का इनपर से विश्वास लगातार कम हो रह था। वही धर्म के नाम पर इनके द्वारा किये जाने वाले शोषण एवं अत्याचार के कारण साधारण जनता का इस वर्ग के प्रति बढता असंतोष फ्रांस के क्रांति के प्रमुख कारणो मे एक थी।
5. वैचारिक कारण- वैचारिक कारक फ्रांस की क्रांति की एक प्रमुख विशेषता थी। समकालीन चिंतकों के तार्किक एवं वैज्ञानिक विचारों ने ना केवल फ्रांसीसी जनता को जागरूक किया बल्कि उन्हें क्रांति के लिए प्रेरित भी किया। इन विचारकों में प्रमुख रूप से मान्टेस्क्यू, रूसो, वाल्टेयर आदि थे। इनके क्रान्किारी विचारों में राजा के निरंकुशता, चर्च के अंधविश्वासों के प्रति जनता को एक जुट किया और स्वतंत्रता, समानता, बन्धुत्व जैसे नये विचारों से सामान्य जनता को परिचित कराया। जिसकी प्राप्ति के लिए जनता क्रांति की ओर प्ररित हुई।
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