वाणिज्यिक क्रांति - Commercial Revolution

वाणिज्यिक क्रांति - Commercial Revolution

क्रांति किसी भी वस्तु, घटना या परिस्थिति में होने वाला अमूल-चूल बदलाव है। वाणिज्यिक क्रांति का अभिप्राय उस अमूल-चूल एवं व्यापक बदलाव से है, जो मध्यकालीन यूरोपीय समाज की अर्थव्यस्था में आया, जिससे वहा के व्यापार एवं वाणिज्य का तेजी से विस्तार हुआ । वास्तव में यह क्रांति यूरोप के कुछ देशों द्वारा अपनी आर्थिक एवं राजनीतिक सत्ता को बढ़ाने के लिए किये गये प्रयास का परिणाम थी। इसमे प्रमुख रूप से स्पेन, पुर्तगाल, हालैण्ड और इंग्लैंड थे। यूरोप में वाणिज्यिक क्रांति का काल 14वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी के मध्य तक माना गया। इस क्रांति को स्पष्ट रूप से समझने के लिए इसके पीछे के कारण को समझना आवश्यक होगा।


वाणिज्यिक क्रांति के कारण


1- व्यापारिक वर्ग का उदय यूरोप में सामंतवाद का पतन तथा धर्मयुद्ध का दौर चल रहा था। मार्कोपोलो ने पूर्वी देशों की यात्रा की जिसके विवरणों से यूरोपवासियों को पूर्वी देशों की वस्तुओं के विषय में जानकारी प्राप्त हुई इसका प्रभाव यह हुआ कि पूर्वी देशों की भोग-विलास की वस्तुओं एवं मसालों की मॉग यूरोप में तेजी से बढनें लगी। जिससें यूरोप में एक नवीन व्यापारिक वर्ग का उदय हुआ। प्रारंभ में इटली के उत्तरी शहर वेनिस तथा जेनेवा इस तरह से व्यापारिक क्रेन्द थे। मसालों, रेशम आदि के व्यापार से इन व्यापारियों को अत्यधिक लाभ हुआ।


2- तुर्कों का कुस्तुनतुनिया पर अधिकार धर्म युद्धों के पश्चात् यूरोपीय व्यापार को उस समय भारी क्षति हुई जब कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लिया। और यूरोप के उस व्यापारिक मार्ग को बन्द कर दिया जिसके माध्यम से वें भारत सहित पूर्वी देशों से व्यापार करते थे। 


3- समुद्री यात्राएं और भौगोलिक खोजें- यूरोप वासी पूर्वी देशों के मसालों, कपडो एवं भोग-विलास के वस्तुओं के आदी हो चुके थे। स्थल व्यापारिक मार्ग के बन्द हो जाने के कारण वें नवीन समुद्री मार्गों के खोज की ओर प्ररित हुए। इटलीवासी क्रिस्टोफर कोलम्बस स्पेन के राजा के संरक्षण में भारत की खोज पर निकला था। किंतु वह उत्तरी अमेरिका जा पहुचा इस तरह अचानक ही अमेरिका जैसे देश की खोज हुई। अमेरिका के इस संयोगमय खोज से स्पेन को बहुत लाभ हुआ। 1498 में पुर्तगाल के यात्री वास्कोडिगामा ने समुद्री मार्ग से भारत की खोज की। जिससे यूरोप का भारत से व्यापार का नया मार्ग खुला।


इन भौगोलिक खोजें ने यूरोप के व्यापारिक क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाये। और यूरोपीय व्यापार में इटली के एकाधिकार को समाप्त किया। जिससे पुर्तगाल, स्पेन, हार्लेण्ड, इग्लैण्ड, फ्रांस को व्यापार में व्यापक लाभ मिला।


4- बैंकिंग व्यवस्था एवं कंपनियों का विकास बैंकिंग व्यवस्था का विकास वाणिज्यिक क्रांति का प्रमुख पहलू था जिससे यूरोप में व्यापारिक ढांचा मजबूत हुआ। और वहां आधुनिक बाजार प्रणाली विकसित हुई जिससे वहां व्यापार करना सरल हो गया। सोनें एवं चॉदी के सिक्को के स्थान पर कागज मुद्रा का चलन हो गया। जिसके फलस्वरूप 16वीं शताब्दी यूरोप में कंपनियों का उद्भव हुआ। अनेक कम्पनियां ऐसी थी जो संयुक्त पूँजी के माध्यम से विकसित हुई थी। जिसमें कुछ कंपनियों को सरकार द्वारा किसी विशेष क्षेत्र में व्यापार का एकाधिकार प्राप्त था। जिन्हें चाटर्ड कम्पनियां कहा गया। ब्रिटिश ईस्ट इण्डियां कम्पनी इसी प्रकार की कम्पनी थी।