सर्वोदय की अवधारणा - concept of Sarvodaya

सर्वोदय की अवधारणा - concept of Sarvodaya

महात्मा गांधी ने संपूर्ण विश्व के विकासक्रम का एक स्वाभाविक वर्णन करते हुए सर्वोदय के विचार को प्रस्तुत किया। इसका शाब्दिक अर्थ सभी का उदया है। गांधी जी के अनुसार एक लोकतंत्र मयदि कुछ लोगों का शोषण होता है, तो इसे सच्चा लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता है। एक समताकारी व्यवस्था वही हो सकती है, जिसमें देश के सभी नागरिकों और संपूर्ण मानव जाति का समान रूप से विकास हो। गांधी बी ने इस विचार के तीन पक्षों का उल्लेख किया है


● प्रेम और अहिंसा


• अंत्योदय


• मानवीय मूल्यों की स्थापना


सर्वोदय की अवधारणा को उद्देश्य निम्न प्रारक से विश्लेषित किया जा सकता है।


1. विकेंद्रीकरण 


2. स्वावलंबन


3. आत्म-अनुशासन में वृद्धि


4. सर्वधर्म समभाव