औद्योगिक क्रांति के नकारात्मक पहलू - Downsides of the Industrial Revolution

औद्योगिक क्रांति के नकारात्मक पहलू - Downsides of the Industrial Revolution

औद्योगिक क्रांति मानवीय सभ्यता के लिए बरदान साबित हुई इसने सामाजिक, आर्थिक, सास्कृतिक, राजनीतिक, क्षेत्र में व्यापक एवं सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। जिससे मानवीय जीवन सुख सुविधाओं से भर गया। साथ ही साथ औद्योगिक क्रांति के कुछ ऐसे प्रभाव भी दिखाई पड़े जिससे मानवीय जीवन के लिए दीर्घ कालीन समस्याएं उत्पन्न हो गयी।


1. कुटीर उद्योगो का पतन औद्योगिक क्रांति के पहले गांव और नगरों में छोटे स्तर पर उद्योग चलते थे। जिन्हें कुटीर उद्योग अथवा लघु उद्योग कहा जाता था। यें उद्योग मुख्य रूप से मानवीय श्रम द्वारा संचालित होते थे। औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुएं जो मशीनो द्वारा संचालित होते थे। जहां कम खर्च एवं श्रम पर अधिक उत्पादन होता था इसलिए विश्व भर के बाजारों में कारखानों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की मांग अत्याधिक बढ़ गयी ये वस्तुएं सस्ती एवं अच्छी होती थी। वहीं कुटीर उद्योगों में अधिक श्रम एवं खर्च पर कम उत्पादन होता था। जिस कारण इन वस्तुओं के दाम अधिक होते थे। इस तरह कुटीर उद्योग कारखानों द्वारा उत्पादित सस्ती वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा नही कर सकें। व्यापार में इन्हें अत्याधिक क्षति होने के कारण धीरे-धीरे इनका पतन होने लगा।


बेरोजगारी की समस्या औद्योगिक क्रांति के बाद स्थापित कारखानों में उत्पादन का ज्यादा तक कार्य मशीनों के माध्यम से किया जाता था। जहां श्रमिकों एवं कारीगरों की सीमित आवश्यकता पड़ती थी। इसीलिए कुटीर उद्योग के पतन के बाद वहां कार्य करने वाले कारीगर एवं श्रमिक बेरोजगार हो गये। इस तरह उद्योगों के विकास के साथ बेरोजगारी की समस्या भी उत्पन्न हुई।


3. गन्दी बस्तियों का विकास औद्योगिक क्रांति के बाद औद्योगिकीकरण तथा शहरीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई। जिसके कारण इंग्लैंड में मानचेस्टर, लंकाशायर, शैफील्ड, आदि जैसे बड़े-बड़े नगरों का विकास हुआ जहां गांवों से बड़ी संख्या में किसान एवं मजदूर रोजगार की तलाश में आकर रहने लगे। इनकें मकान छोटे-छोटे होते थे बस्तियों में सडक, नाली, पानी आदि जैसी सुविधाओं की कमी होती थी। बड़े नगरों के आस-पास बसी इन बस्तियों को गन्दी बस्ती कहां जाता था। आधुनिक नगरों में गन्दी बस्ती का विकास प्रमुख समस्या के रूप में सामने आया है।


4. श्रमिकों की अमानवीय दशा औद्योगिक क्रांति के बाद कुटीर उद्योगों का पतन हो गया। जिसके कारण कारीगर एवं श्रमिकों के बीच बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गयी। और वें अजीविका की खोज में नगरों की गंदी बस्तियों में आकर रहने लगे। कारखानों में ये 12 से 14 घंटे काम करते थे लेकिन इन्हें बेतन बहुत कम मिलता था। जिससे ये अपनी मूल-भूत आवश्यकताओं की पूर्ति भी नही कर पाते थे। और कुपोषण, भुखमरी, आदि जैसी अनेक प्रकार की बिमारियों के शिकार हो जाते थे।


5. प्रदूषण की समस्या - औद्योगिक क्रांति ने पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्या को जन्म दिया। औद्योगिक कारखानों, यातायात परिवहन के साधनों से निकलने वालें धुओं से वायु प्रदुषण की व्यापक समस्या उत्पन्न हुई। साथ ही साथ औद्योगिक कारखानों के अवशिष्ट पदार्थ नालों के माध्यम से नदियों में मिलते थे जिनसे नदियों के प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हुई।


औद्योगिक क्रांति नें औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण की प्रक्रिया को जन्म दिया। परिणाम स्वरूप इंग्लैंड की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्था में कई सकारात्मक परिवर्तन हुएं जिससे वह न केवल समृद्धिशाली बना बल्कि उसे असीम शक्ति भी प्राप्त हुई। जिसकी सहायता से उसने ऐसे साम्राज्य की रचना की जिसका सूरज कभी अस्त नही होता था। इस तरह इस इकाई में औद्योगिक क्रांति, उसके कारणों और प्रभावों की विस्तृत चर्चा के साथ-साथ औद्योगिक क्रांति के कुछ नकारात्मक पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की गयी।