कार्यक्रम के आवश्यक तत्व - Essential Elements of the Program
कार्यक्रम के आवश्यक तत्व - Essential Elements of the Program
कार्यक्रम के आवश्यक तत्व
समूह कार्य प्रक्रिया में कार्यक्रम के तीन आवश्यक तत्व को महत्वपूर्ण रूप से शामिल किया जाता हैं:
1. सदस्य
2. समूह कार्यकर्ता तथा
3. कार्यक्रम की विषय-वस्तु
1. सदस्य
समूह कार्य प्रक्रिया में किसी भी कार्यक्रम की विषय-वस्तु लगभग समान होती है। लेकिन कई बार सदस्यों की आवश्यकता, संस्कृति परमपरा, रीति रिवाज आदि भिन्नताओं के कारण इनमें आवश्यकतानुसार परितर्वत भी किया जाता है। कार्यक्रम की विषय वस्तु को सामाजिक शक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। इन्हीं प्रभाव के आधार पर समूह का आकार संरचना एवं अन्य क्रियाएं, जिनके द्वारा वह उद्देश्य को प्राप्त करता है, निश्चित की जाती है। एक दूसरा पहलू भी इस ओर इंगित करता है कि जिन समाजों में असुरक्षा, सामाजिक उथल पुथल तथा संघर्ष बना रहता है उनके समूहों की संरचना हमेशा ही स्थिर नहीं रह पाती है उनमें हमेशा परिवर्तन होता रहता है। इसी कारण संपूर्ण कार्यक्रम की विषयवस्तु का निर्धारण कुछ ही सदस्यों द्वारा किया जाता है। इन्ही सदस्यों के ऊपर संपूर्ण कार्यक्रम की सफलता एवं असफलता का उत्तरदायित्व होता है एवं यही समूह के भविष्य को भी निर्धारित करता है।
2. समूह कार्यकर्ता
कार्यकर्ता प्रत्येक समूह की प्रत्येक अवस्था में समूह सदस्यों की सहायता करता है एवं सामूहिक लक्ष्य प्राप्ति हेतु सदस्यों को प्रेरित करता है। कार्यकर्ता सामूहिक कार्यप्रणाली द्वारा समूहसदस्यों के विकास, उन्नति, शिक्षा एवं सांस्कृतिक प्रगति पर जोर देता है। कार्यकर्ता प्रत्येक स्तर पर समूह को समझने का प्रयास करता है और समूह में उत्पन्न समस्या का निवारण प्रस्तुत करता है। कार्यकर्ता यह निर्धारित करता है कि किस प्रकार के समूह का निर्माण किया सकता है जैसे मनोरंजनात्मक शिक्षात्मक, सामाजिक या मिश्रिता साथ ही वह समूह कार्य की कार्य प्रणाली निर्धारित करता है जैसे- खेल-कूद, ड्रामा, वार्तालाप इत्यादि कार्यकर्ता स्थान का चयन करता है, समय का निर्धारण करता है. समूह अवधि का निर्धारण करता है संसाधन का निर्धारण करता है. माध्यमों का निर्धारण करता है, समूह का उद्देश्य निर्धारित करता है, सदस्यों का चयन निर्धारित करता है, संस्था अथवा समुदाय में स्रोतों का निर्धारण करता है। समूह कार्यक्रमों को नियोजित करने में भी कार्यकर्ता समूह के साथ मिलकर कार्यक्रमों को नियोजित करने में समूह सदस्यों की सहायता करता है। वह कार्यक्रम को अधिक प्रभावशाली एवं रचनात्मक बनाने में समूह की सहायता करता है, जिससे अधिक से अधिक समूह की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और इसके अतिरिक्त वह समूह को कार्यक्रम हेतु दिशा-निर्देश देता है। समूह की रुचियों की खोज करता है। अंत क्रिया का निर्देशन करता है। कार्यकर्ता द्वारा मुख्य रूप से सदस्यों में नेतृत्व का विकास भी किया जाता है। वह समूह के प्रत्येक सदस्य को कोई जिम्मेदारी बाला कार्य सौंपता है, जिससे समूह में एकता भी बनी रहे और किसी भी प्रकार उच्च निम्न का भाव जागृत ना हो सके।
3. कार्यक्रम की विषय-वस्तु
समूह कार्य प्रक्रिया में किसी भी कार्यक्रम की विषय-वस्तु लगभग समान होती है। लेकिन कई बार सदस्यों की आवश्यकता, संस्कृति, परंपरा रीति रिवाज आदि भिन्नताओं के कारण इनमें आवश्यकतानुसार परिर्वत भी किया जाता है। कार्यक्रम की विषय वस्तु को सामाजिक शक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। इन्हीं प्रभाव के आधार पर समूह का आकार, संरचना एवं अन्य क्रियाएं, जिनके द्वारा वह उद्देश्य को प्राप्त करता है, होता रहता है। इसी कारण संपूर्ण कार्यक्रम की विषयवस्तुका निर्धारण कुछ ही सदस्यों द्वारा किया जाता है। इन्ही सदस्यों के उपर संपूर्ण कार्यक्रम की सफलता एवं असफलता का उत्तरदायित्व होता है एवं यही समूह के भविष्य निश्चित की जाती है। एक दूसरा पहलू भी इस ओर इंगित करता है कि जिनसमाजों में असुरक्षा, सामाजिक उथल पुथल तथा संघर्ष बना रहता है उनके समूहों की संरचना हमेशा ही स्थिर नहीं रह पाती है उनमें हमेशा परिवर्तन को भी निर्धारित करता हैं।
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