फ्रांसीसी क्रांति एवं बौद्धिक चिंतन - French Revolution and Intellectual Thought
फ्रांसीसी क्रांति एवं बौद्धिक चिंतन - French Revolution and Intellectual Thought
18वीं शताब्दी में फ्रांस में पुरानी रूढिवादी व्यवस्था विरूद्ध वैचारिक तार्किक चिंतन का प्रारम्भ में हुआ। इसका कारण यह था कि समकालीन दाशर्निकों एवं चिन्तको का उद्देश्य सत्य का अन्वेषण था। जिससे उन्होनें ने प्रत्येक परम्परा, विश्वास और रूढि को तर्क की कसौटी पर कसना शुरू किया। जिसके कारण सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक चिंतन में नये प्रतिमान स्थापित हुएं, जिनमें प्रमुख रूप से शक्ति का पृथक्करण, धार्मिक सहिष्णुता, जीवन जीने की स्वतंत्रता, वैयक्तिक स्वतंत्रता, सम्पति का अधिकार तथा समानता और बन्धुत्व जैसे तार्किक मूल्य प्रमुख थे। जिन्होंनें ने फ्रांसीसी नागरिकों के चिंतन में व्यापक बदलाव लाए, चिंतन में इन्हीं बदलाव के फलस्वरूप फ्रांसीसी समाज में परिवर्तन शुरू हुए। जिसका चरम 14 जुलाई 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के रूप में सामने आया।
इस तरह से देखा जाय तो फ्रांसीसी क्रांति और समकालीन बौद्धिक चिंतन के बीच गहरा संबंध था। जिसको स्पष्ट रूप से समझनें के लिए आवश्यक है कि उन सामाजिक चिंतकों के विचारों को समझा जाय जिनका प्रभाव फ्रासीसी क्रांन्ति पर वृहद रूप से पड़ा जिनमें प्रमुख रूप से मान्टेस्क्यू, वाल्टेयर, लॉक, रूसो आदि प्रमुख थे।
1. मान्टेस्क्यू फ्रांस के निरकुंश राजतंत्र के आलोचना की शुरूआत मान्टेस्क्यू ने किया इनकी पुस्तक 'दा स्प्रिंट ऑफ लॉज' का फ्रांस के विचार धारा पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिसमें इन्होनें ने शक्ति के पृथक्करण सिद्धांत देते हुए कहा कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियों का एकीकरण नही होना चाहिए। इन तीनो शक्तियों का नियंत्रण एवं नियमन भिन्न-भिन्न संस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
2. वाल्टेयर वाल्टेयर फ्रास का एक महान विचारक था। वह बौद्धिक स्वतंत्रता का प्रबल समर्थक था। इसने चर्च की असहिष्णुता तथा पाखंड का कड़ा विरोध करते हुए धार्मिक सहिष्णुता का समर्थन किया। साथ ही वाल्टेयर ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विचार रखते हुए कहा कि नागरिकों को बोलने की आजादी होनी चाहिए। वाल्टेयर के विचारों का फ्रांस की जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा। जिससे जनता में चर्च के प्रति अंधविश्वास दूर हुआ।
3. रूसो रूसों स्वतंत्रता, समानता, बन्धुत्व जैसे क्रांतिकारी विचारों का प्रणेता था। इन्होनें अपनी पुस्तक ‘दा सोशल कान्ट्रैक्ट में कहा कि मनुष्य स्वतंत्र हुआ था किंतु व सदैव बन्धनों मे बंधा रहता है' रूसो के इन विचारों ने फ्रांस के निरकुश राजतंत्र की जड़े खोद दी, जिससे वह भरभरा कर गिर गया और नष्ट हो गया।
4. जॉन लाक- यह एक अंग्रेज विचारक था। जिसके व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सम्पत्ति अर्जन की स्वतंत्रता जैसे विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति पर अपना प्रभाव डाला। यह सीमित संप्रभुता सिद्धांत का समर्थक था, जिसमें मनुष्य अपने प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा कर सकें।
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