फ्रांस की क्रांति - French Revolution
फ्रांस की क्रांति - French Revolution
यूरोपीय समाज में पुर्नजागरण काल के बाद मानवीय चिंतन में तार्किता का समावेश होना लगा था। 18वीं शताब्दी तक फ्रांस में इसकी (तार्किता) परिपक्वता स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ने लगी। जब मान्टेस्क्यू. वाल्टेयर, रूसों जैसे विचारकों ने फ्रांसीसी समाज में व्याप्त निरंकुश राजतंत्र, शोषणकारी सामंतवाद तथा धर्माधिकारियों के अंधविश्वासों एवं आडंबरों का कड़ा विरोध शुरू किया। फ्रांस के समाज पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। जिससे शोषित, प्रताड़ित जनता का असंतोष चरम पर पहुंच गया। जिसकी प्ररिणति फ्रांसीसी क्रांति के रूप में हुई। इस क्रांति ने फ्रांस के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व्यवस्था में अमूल-चूल बदलाव लाने के साथ, फ्रांस में स्वतंत्रता, समानता, बन्धुत्व जैसे नवीन तार्किक मूल्यों के स्थापना की। बाद जिसकी प्रभाव सम्पूर्ण मानवीय समाज पर पड़ा।
1789 में हुई फ्रांसीसी क्रांति एक वैचारिक क्रांति थी। जिसमें यूरोप के साथ-साथ पूरे विश्व के समाज में स्वतंत्रता, समानता, बन्धुत्व जैसे तार्किक विचारधारा के स्थापित किया। इस क्रांति का अध्ययन करने वाले अनेक सामाजिक विचारकों का मानना है कि दुनिया की किसी दूसरी घटना ने विभिन्न देशो में सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक संरचना को इतना प्रभावित नहीं किया जितना की फ्रांस की क्रांति ने। फ्रांस की यह क्रांति विश्व की उन प्रमुख घटनाओं में से है। जिसने पूरे विश्व में लोगों के चिंतन के आधार को ही बदल दिया। यह चिंतन राज्य और समाज को नवीन सिद्धांतों पर पुनर्गठित किया जिसमें जनता के आंकाक्षाओं और सामाजिक मूल्यों को सर्वोपरि स्थान प्राप्त था। फ्रांस की क्रांति को समझने के लिए उन सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक दशाओं को समझना आवश्यक होगा जिसकी पृष्ठभूमि में फ्रांसीसी क्रांति का प्रादुर्भाव हुआ।
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