समूह कार्य और वृद्ध चिकित्सा देखभाल - Group Work and Aged Medical Care

समूह कार्य और वृद्ध चिकित्सा देखभाल - Group Work and Aged Medical Care

समूह कार्य और वृद्ध चिकित्सा देखभाल

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत देश की विभिन्न राज्य सरकारों तथा संघीय क्षेत्रों ने वृद्ध व्यक्तियों की सहायता हेतु वृद्धास्था पेंशन योजना को प्रारंभ किया है। सर्वप्रथम इस योजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1957 में प्रारंभ किया।

इसके अलावा हैल्पेज न्यासकोष, हैल्पेज इंडिया (1978), एज-केयर-इंडिया (1980) एवं दिवा केंद्र इत्यादि को स्थापित कर वृद्धों की समस्याओं को दूर करका प्रयास किया जा रहा है, जिसमें समूह कार्यकर्ता वृद्धों के कार्यों को सृजनात्मक कार्यक्रमों के रूप में बदलने का प्रयास करता है। उनमें उत्पन्न सांवेगिक समस्याओं को दूर करने का भी प्रयास करता है। परिवार में समायोजन स्थापित करने में सहायता करता है और संगठित मनोरंजन के साधन को उपलब्ध कराने में सहायता करता है। इसके साथ-साथ वृद्ध चिकित्सा भी आज के वर्तमान समय में बहुत अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। परिवारों का विघटन, एकाकी परिवार शहरों की ओर पलायन इत्यादि समस्याओं ने वृद्धों की समस्याको अत्यधिक बढ़ा दिया है। सरकारी आकड़ों की ओर यदि ध्यान आकर्षित किया जाए तो भारत में लगभग 1000 वृद्धआश्रम है। इसके अतिरिक्त अन्य स्वैछिक, गैरसरकारी एवं व्यावसायिक संगठनों के माध्यम से वृद्ध सहायता का कार्य किया जाता है। वृद्ध व्यक्तियों की अपनी भिन्न प्रकार की समस्याएँ होती हैं। इनमें मुख्य रूप से मानसिक और शारीरिक रोग प्रमुख होते हैं। वृद्ध व्यक्तियों को एक अलग प्रकार की देखभाल की आवश्यकता होती है। कोरी एवं कोरी ने (1982, 348) ने वृद्धावस्था की निम्न मुख्य समस्याओं की ओर अपना ध्यम आकर्षित किया है 


> अकेलापन तथा सामाजिक अलगाव, परिवार द्वारा त्यागे जाने की भावना, जीवन में साधन उपलब्ध करने का संघर्ष, निर्भरता, काम न होने की स्थिति में खाली पन का होना। निराशा तथा अकेला पन, मृत्यु का भय व अन्य लोगों की मृत्यु होने पर संताप होना वृद्धों की प्रमुख रूप से विशेषता है।


> अन्य स्थानों पर पहुँचने की समस्या । 


> समूह सत्रों पर ध्यान देने की कमी आना।


> विरोध के स्थान पर सहायता और उत्साह की आवश्यकता।


> सुनने और समझने की अत्यंत आवश्यकता। 


उपर्युक्त प्रकार से वृद्धों की समस्याओं को देखा जा सकता है। वृद्धों की समस्याओं के निराकरण हेतु कुछ सामाजिक समूहों का निर्माण किया जाता है जो कि उनकी समस्याओं को काफ़ी हद तक सुलझाने में सार्थक साबित होते हैं।


• सहायता समूह -


सहायता समूह का कार्य वृद्धों की मनोसामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु किया जाता है। बहुधा देखा जाता है कि वृद्ध एक साथ नहीं रहते है और यदि कुछ वृद्ध एक साथ रहते भी है तो उनमें अंतक्रिया कम ही होती है। सहायता समूह द्वारा अकेलेपन की समस्याओं को दूर किए जानेका प्रयास किया जाता है। अनेक सहायता समूह कार्यकलाप सुझाव प्रस्तुत करते है, जिससे कि अन्य सदस्यों के साथ सुंदर स्थलों पर जाकर अनेक सामाजिक गतिविधियों, जैसे – चित्र बनाकर, बीते समय की बातों को याद करके अपने आप में आनंद की अनुभूति करते हैं। 


• मनोरंजनात्मक समूह


मनोरंजनात्मक समूह द्वारा वृद्धों की सहायता का कार्य अनेक प्रकार के खेलों का आयोजन करके किया जाता है, जिससे उनके मन को बहलाया जा सके। इस प्रकार के कार्यकलापों द्वारा वृद्धों को विभिन्नसमूहों में बांटकर उन्हें कार्यक्रम में भाग लेने हेतु प्रेरित किया जाता है, जिससे प्रत्येक सदस्य की प्रत्यक्ष भागीदारी हो सके। खेल का चयन वृद्धों की पसंद एवं आवश्यकताओं पर निर्भर होता है।


• चिकित्सीय समूह


चिकित्सीय समूह में मानवीकृत एवं गैर मानवीकृत चिकत्साओं को शामिल किया जाता है। मानवीय चिकित्सा द्वारा वार्तालाप संबंधी व्याहार चिकित्सा और संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा को शामिल किया जाता है। जबकि गैर-मानवीकृत चिकित्सा में गैर-संरचनात्मक साधनों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें सदस्यों और जीवन समीक्षा भावनात्मक स्थितियों पर गैर-संरचनात्मक साधनों से ध्यान केंद्रित किया जाता है।


विशेष योग्यता रखने वाले व्यक्ति और समूह कार्य 


विशेष योग्यता रखने वाले व्यक्ति, जिन्हें पूर्व में बाधित व्यक्ति कहा जाता था ऐसे व्यक्ति जो अपनी व्यक्तिगत, शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक सीमाओं एवं परिस्थितियों के कारण अपना जीवन सामान्य रूप से बिताने में असमर्थ हैं, को विशेष योग्यता रखने वाले व्यक्ति कहा जाता है।

ऐसे व्यक्तियों को भारत सरकार के समाज कल्याण विभाग ने 4 भागों में बाँटा है- प्रथम, शारीरिक दृष्टि से विकलांग ऐसे व्यक्ति जिनकी शारीरिक क्षमता उनके किसी भी शारीरिक अंग द्वारा हास, विकृति या किसी अन्य कारण से खराब हो गई है। दूसरे नेत्रहीन, तीसरे मूक-बधिर और चौथे, मानसिक दृष्टि से मंदित/ कुष्ठ रोगी। इन सभी व्यक्तियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता समस्याओं को समझकरउनका उपचार करता है तथा उसे संस्था में समुदाय में उपलब्ध साधनों के उपयोग में में सहायता करता है। साथ ही वह परिवार के सदस्यों को सहयोग एवं मनोसामाजिक समस्याओं का समाधान करने में सहयोग प्रदान करता है। विशेष योग्यता रखने वाले व्यक्तियों के लिए भारत सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कुछ महत्त्वपूर्ण संस्थाओं को बनाया गया है जिसमें इन व्यक्तियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर इनका निर्माण किया गया है।


आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ समूह कार्य


1975 में बाल-नीति के बनने के बाद से ही आगनवाड़ी कार्यक्रमों को चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services. ICDS) का ही एक मुख्य भाग है। इसके माध्यम से ग्रामीण समुदाय में बच्चों और महिलाओं की शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है।

आंगनवाड़ी में बच्चोंबच्चियों को प्राथमिक शिक्षा और भोजन उपलब्ध कराया जाता है। आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता द्वारा स्थानीय क्षेत्र की महिलाओं के समूहों को स्वास्थ्य शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। ये गर्भवती महिलाओं और सात वर्ष की आयु तक के बच्चोंबच्चियों के लिए स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देते हैं। स्थानीय क्षेत्र में समूह कार्यकर्ता द्वारा किशोर बालिकाओं के लिए जागरूक कार्यक्रमों और विकासात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कार्यकर्ता इस क्षेत्र में अनेक रचनात्मक कार्यक्रम के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बच्चों एवं महिलाओं के क्षेत्र में कार्य करता है।