गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समूह कार्य - Group Work by Non-Governmental Organizations

गैर-सरकारी संगठनों द्वारा समूह कार्य - Group Work by Non-Governmental Organizations


वर्तमान प्रकाशित आँकड़ों के आधार पर भारत में गैर-सरकारी संगठनों की संख्या लगभग 33 लाख है, जिसमें से 40 हजार संगठनों को विदेशी फंड (एफ.सी.आर.ए.) प्राप्त है। इन संख्याओं को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में गैर-सरकारी संगठनों की कितनी उपयोगिता है।

गैर-सरकारी संगठन संस्थानीकरण की प्रक्रिया और समुदायों के माध्यम से विशेष लक्ष्य वाले समूहों को सेवा उपलब्ध कराने में हमेशा से ही प्रयत्नशील रहे हैं एवं उनके कार्यों को भी सराहा गया है। इनके माध्यम से महिलाएँ, बच्चे वृद्ध, मानसिक या शारीरिक विकलांग जैसे लोगों को विभिन्न माध्यमों से सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इन सभी केंद्रों में, समाज कार्यकर्ता कौशल विकसित करना, आत्मविश्वास पैदा करना, और आत्मप्रतिष्ठा, प्रोत्साहन, उपलब्धि का लक्ष्य, जागरूकता निर्माण करना इत्यादि कार्य करता है।


आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ समूह कार्य- 


बाल-नीति के बनने के बाद से ही आगनवाड़ी कार्यक्रमों को चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services ICDS) का ही एक मुख्य भाग है। इसके माध्यम से ग्रामीण समुदाय में बच्चों 3.5.10 आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ समूह कार्य 1975 में बाल-नीति के बनने के बाद से ही आगनवाड़ी कार्यक्रमों को चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (Integrated Child Development Services . ICDS) का ही एक मुख्य भाग है।

इसके माध्यम से ग्रामीण समुदाय में बच्चों और महिलाओं की शैक्षिक और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है। आंगनवाड़ी में बच्चों/बच्चियों को प्राथमिक शिक्षा और भोजन उपलब्ध कराया जाता है। आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता द्वारा स्थानीय क्षेत्र की महिलाओं के समूहों को स्वास्थ्य शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। ये गर्भवती महिलाओं और सात वर्ष की आयु तक के बच्चों/बच्चियों के लिए स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देते हैं। स्थानीय क्षेत्र में समूह कार्यकर्ता द्वारा किशोर बालिकाओं के लिए जागरूक कार्यक्रमों और विकासात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कार्यकर्ता इस क्षेत्र में अनेक रचनात्मक कार्यक्रम के द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बच्चों एवं महिलाओं के क्षेत्र में कार्य करता है।


स्व-सहायता समूह एवं समूह कार्यकर्ता स्व-सहायता समूह (Self Help Group)


भारत सरकार द्वारा स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंर्तगत। अप्रैल 1999 से प्रारंभ किया गया है। इस योजना के अंर्तगत गरीब परिवारों को स्वरोज़गार की सहायता देना है।

ऐसे ग्रामीण जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं तथा जिनकी आपस की आय और गतिविधियाँ एक हो स्व-सहायता समूह के अंर्तगत आते हैं। इस समूह के सदस्य अपनी दैनिक आय अथवा मासिक आय से कुछ बचत कर समूह के पास जमा करते हैं तथा समूह आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंद सदस्य को ऋण देती है, जिससे सदस्य अपनी आवश्यकता पूरी कर ऋण राशि आसान किश्तों में वापस जमा कर सकें। ब्याज से आय समिति के कार्यकलापों में खर्च किया जाता है। स्व-सहायता में 10 से 20 सदस्य हो सकते हैं जो अपनी गतिविधियों के अनुसार समूह का नाम रख सकते हैं। स्व-सहायता समूह के माध्यम से लोग अपनी मूलभूत आ पूर्ति करने में सक्षम होते है। स्व-सहायता समूह के लिए मुख्य रूप से कुछ महत्त्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता होती है, जैसे


1. स्व-सहायता समूह गठन के बाद नियमित बैठक आवश्यक है।


2. समूह के सदस्यों को बैठक में भाग लेना आवश्यक है। 


3. बैठक में समूह की गतिविधियों, समूह को सुदृढ़ करने समूह की आय बढ़ाने सदस्यों को ऋण की आवश्यकता, गाँव की समस्या, बच्चों / बच्चियों को पढ़ने/बढ़ने पर चर्चा आदि पर विचार करना चाहिए। 


4. बैठक में की गई चर्चा का ब्यौरा कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज करना आवश्यकतानुसार ऋण दिया जा सके। 


5. समिति से प्राप्त ऋण का सही उपयोग करें, जैसे- अपने व्यवसाय में लगाएँ, बच्चों/बच्चियों के पढ़ने-बढ़ने पर खर्च करें अथवा अपने अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों में लगावें। 


6. समिति से प्राप्त ऋण समिति की शर्तों के अनुसार समय के अंदर दें।


7. समूह के छह माह सफल संचालन के उपरांत समिति सदस्य अथवा अध्यक्ष अपने ग्राम के ग्राम सहायक विस्तार अधिकारी अथवा विकास खंड अधिकारी से संपर्क कर समिति के चयनित व्यवसाय के ऋण के लिए संपर्क करें।


तो इस प्रकार उपर्युक्त स्व-सहायता समूह की गतिविधियों को संचालित किया सकता है। स्व-सहायता समूह समूह कार्य प्रणाली का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण उदाहरण है जिसके माध्यम से संपूर्ण विधि को संचालित किया जा सकता है। स्व सहायता समूह के कुछ महत्त्वपूर्ण अभिलेख भी होते हैं जिनके माध्यम से इसका संचालन किया जाता है जिनमें मुख्य रूप से रोकड़ पंजी का संधारण समूह की रोकड़ पूँजी सदस्य खाता, सदस्य का व्यक्तिगत पास बुक, समूह की कार्यवाही, पूँजी, ग्राम सभा में अनुमोदन, इत्यादि होते हैं। इस प्रकार समूह कार्य में स्व सहायता समूह गतिविधि एक महत्त्वपूर्ण कार्य विधि हो सकती है। जिस प्रकार स्व-सहायता समूह में कार्यों को संचालित किया जाता है उसी प्रकार समूह कार्यों को भी एक निश्चित लक्ष्य प्राप्ति के लिए किया जाता है।