शैक्षिक स्थापना में समूह कार्य - Group Work in Educational Setting

शैक्षिक स्थापना में समूह कार्य - Group Work in Educational Setting

शैक्षिक स्थापना में समूह कार्य

शैक्षिक स्थापनों में समूह कार्य को निम्न बिंदुओं के माध्यम से समझा सकता है: -


विद्यालयों में समूह कार्य- वर्तमान समय में विद्यालय समाज कार्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य समझा जाने लगा अभिभावकों के साथ मिलकर इसे हल करने का प्रयास किया जाता है। आज के समय में विद्यार्थियों का सामंजस्य भी एक प्रमुख समस्या बनकर सामने आ रही है। विद्यार्थी कक्षा में, सहपाठियों के साथ एवं और तो और अपने परिवार में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता है।

विद्यालय समाज कार्य के माध्यम से छात्र-छात्राओं में व्यक्तित्व विकास जैसे पक्षों पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही साथ जो विद्यार्थी किसी अन्य समस्या से ग्रस्त रहता है समूह कार्यकर्ता के माध्यम से शिक्षकों एवं परिवार में सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता है जिससे वह गलत रास्तों को ग्रहण कर लेता है जिससे अनेक बाल अपराध जैसी समस्याएँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। समूह कार्यकर्ता ऐसे बच्चों के सामंजस्य हेतु अनेक प्रकार के रचनात्मक कार्यक्रमों को इस प्रकार से आयोजित करता है कि समूह गतिविधियों के माध्यम से समूह लक्ष्य तथा इसी तरह से व्यक्तिगत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करें। समूह कार्य का मुख्य उद्देश्य छात्र छात्राओं को अपने स्वयं के कार्यों से सीखना है इन समस्त कार्यों हेतु समूह कार्यकर्ता विद्यालयी कार्य के माध्यम से उन्हें समाज में सामंजस्य स्थापित करने हेतु सहायता करता है। सामाजिक जीवन शैली हर मनुष्य पर प्रभाव डालती है और बाहरी तनाव भी उत्पन्न करती है। कई ऐसी ही घटनाओं से किसी तथ्य के प्रति गलत या सही एक धारणा बन जाती है। हर युग में तरह-तरह की समस्याए विद्यमान रही है।

आमतौर पर जो एक व्यक्ति देखता, सीखता, समझता है, वह उसी प्रकार अपनी सारी प्रतिक्रियाएं व्यक्त करता है। शैक्षिक संस्थाओ, चिकित्सालयों आदि जगहों से ऊपर दी गयी सारी समस्याओं से निपटने के लिए वर्तमान में परामर्शदाता और समाज कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जा रही है। वर्तमान में विद्यालयों में समूह कार्य की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। और यह सिर्फ व्यावहारिक समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समस्याओ का निवारण करना आवश्यक हो गया है, जिसके कारण विद्यार्थी तनाव ग्रसित होते जा रहे है। विद्यार्थियों के जीवन में आने वाली कुछ अहम् समस्याओं के निवारण, और उनकी क्षमता में वृद्धि किया जा रही है। ये सभी तथ्य कहीं न कही न कहीं पाठ्यकर्म से संबंधित है जैसे कि व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल, स्वास्थ्य और इत्यादि हो सकते है। समूह विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें से एक है विद्यालय। समाज विभिन्न समूहों का प्रयोग विभिन्न प्रकार से करता। विद्यालय में समूह कार्य प्रयोग करने से विभिन्न लाभ है-


• विद्यार्थी अपना काफी समय इस प्रकार समूह में बिताता है, जिससे उन्हें कार्य करने में आसानी होती है।


• विद्यार्थी कार्य क्षेत्र के वातावरण से परिचित हो जाता है। 


• समूह में कार्य करने से परिणाम स्वरूप यह निश्चित माना जाता है, कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सम्बन्ध में काफी सुधार आता है।


विद्यालय में समूह कार्य प्रयोग के करने से कुछ हानियाँ भी है-


1.कभी-कभी समय के अभाव के कारण समूह कार्य के अभ्यास को रोका जा सकता है।


2. समूह के निर्माण के लिए स्थान की कमी होना।


3. ज्यादातर समूह में सभी की भागीदारी और सहयोग में वृद्धि नहीं होती जिस कारण समूह कार्य बंद हो जाता है।


4. स्टाफ की कमी होने के कारण विभिन्न कौशलों का विकास नहीं हो पाता। 


विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में कुछ समस्याएं इस प्रकार हैं-


अत्यधिक संघर्ष, अपने साथियों के साथ रहने में असमर्थता, दूसरे बच्चों को चोट पहुँचाना, विद्यालय के बच्चों की हिंसा, विद्यालय के प्रति घटिया विचारधारा, चोरी करना, हिंसा या क्रोध करना। विद्यालयों में प्रयोग किए जाने वाले समूहों के प्रकार -


1. शैक्षिक समूह - इस समूह में शिक्षा प्रदान करने का माध्यम कहानियां, दृष्टान्त होता है। इस समूह में ऐसे में विषयों और पाठ्यक्रमों को पढ़ाया जाता है, जो उनके पाठ्यकम में शामिल नहीं है, जैसे जीवन कौशल, कार्य कौशल इत्यादि।


2. मनोरंजनात्मक समूह– यह समूह खेल और क्रीडा गतिविधियों को उपलब्ध करता है। इस समूह के माध्यम से कई अनुभव अर्जित किए जा सकते है। 


3. व्यक्तित्व विकास समूह - इस समूह का मुख्य उद्देश्य आत्मविश्वास और आत्मप्रतिष्ठा का विकास करना है। साक्षात्कार, व्यक्तित्व तैयार करने की आदतों के कौशलों के माध्यम से सुधार किया जाता है 


4. उपचार समूहों - बच्चों में पाई जाने वाली मनो-सामाजिक समस्याओं के कारण की पहचान इस समूह के माध्यम से की जाती है। कई अध्ययन के अनुसार 10 से 13 वर्ष की आयु समूह के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ऐसा करने से उनमे विशिष्ट और महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं।