महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in the Field of Women and Child Development

महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in the Field of Women and Child Development

महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में समूह कार्य 

समाज कार्य के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कार्य महिला एवं बालविकास का है जो आज के दौर में समूह कार्यकर्ताओं द्वारा आवश्क रूप से किया जा रहा है। प्राचीन काल से ही महिलाओं को अधिक कमज़रे माना जाता रहा है। उनके साथ हमेशा से ही भेदभाव किया जाता रहा है। हमेशा ही लिंगभेद होते आ रहा है जिस कारण से वे हमेशा पिछड़ी रही।

जबकि यह सर्वविदित है कि महिलाओं की भागीदारी के बिना राष्ट्र व समाज का विकास असंभव है। समूह कार्य के माध्यम से आवश्यकता ग्रस्त महिलाओं को शिक्षण प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जाता है। यदि कहें तो महिलाओं के सर्वांगीण विकास हेतु सरकार द्वारा भी कुछ पहल की जारही है, जिनमें प्रमुख रूप से वर्ष 1990 को बालिका वर्ष के रूप में मनाना, वर्ष 2001 को महिला वर्ष के रूप में मनाना, यू.एन.ओ.द्वारा 1975 को अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष और 1975-85 को अंतरराष्ट्रीय महिला दशक के रूप में घोषित करना और और वैश्विकात्तर पर 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में मनाना शामिल है। भारत सरकार द्वारा प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में भी महिलाओं को लेकर अनेक कार्यक्रमों को संचालित किया जा रहा है। सरकार द्वारा मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमुख योजनाएँ चलाई जा रही है, जिनमें प्रमुख हैं 

डवाकारा योजना 1982 एकीकृत ग्राम्य विकास योजना की सहायक योजना के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं एवं बच्चों के लिए प्रारंभ की गई। महिला विकास निगम (1986-87) में महिला विकास निगम को इस उद्देश्य के साथ बनाया गया कि महिलाओं में अधिक रोज़गार के साधन प्रदान किए जाएँ। महिलाओं को स्वरोज़गार हेतु वित्तीय सहायता महिलाओं में उद्यम को बढ़ावा देने के लिए निगम अपने फंडों में से 3 प्रतिशत से 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण देता है। इसके अतिरिक्त विशेष केंद्रीय सहायता के अधीन अनुसूचित जाति की पीले कार्ड धारक महिलाओं को स्वीकृत ऋण का 25 से 35 प्रतिशत तक की पूँजी में सब्सिडी दी जाती है। महिला समाख्या कार्यक्रम (1988) के माध्यम से समाज एवं अर्थव्यवस्था में महिलाओं द्वारा अपने योगदान की उपयोगिता पहचान सकने में उनकी सहायता करना एवं वर्तमान शिक्षा प्रणाली में नए जीवन का संचार करना एवं यह विश्वास दिलाना कि महिलाएँ स्वयं अपनी एवं अपने बच्चों की देखभाल कर सकती है।

इस प्रकार सरकार द्वारा अनेक कार्यक्रमों को महिलाओं के विकास हेतु चलाया जा रहा है जिसमें समूह कार्यकर्ता समूह कार्य के माध्यम से इन कार्यक्रमों को संचालित करने में सहायता करता है। महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा सहभागी होने में के लिए प्रेरित करता है। दूसरी ओर बालकों के विकास हेतु समूह कार्य को समझे तो भारत सरकार द्वारा वर्ष 974 में साथ बाल-नीति का निर्माण किया गया, जिसमें अनेक प्रावधान बच्चों के लिए किए गए और साथ-ही-साथ प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में भी बच्चों के कल्याण हेतु कार्यक्रमों को सुनिश्चित किया गया है। विभिन्न संचालित योजनाओं जैसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की स्थापना 1985 में की गई। इन दोनों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीसी) 2 अक्टूबर 1975 से इस उद्देश्य के साथ बनाया गया कि () 6 वर्ष के बच्चों के पोषाहार और स्वास्थ्य में सुधार लाया जाए। संविधान की धारा 21 ए में भी 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया है। 1995 से मध्याह्न भोजन को प्रारंभ किया गया है।

इन सभी कार्यक्रमों में गैर-सरकारी संगठन और समूह कार्यकर्ता अपने स्तर से कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने में सहायता करते हैं और समूह प्रयास से यह तय करते हैं कि कैसे इन योजनाओं को सफल बनाया जाए जिससे कि महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में भी समूह कार्यकर्ता अपनी अहम भागीदारी को सुनिश्चित कर सकें।