युवा के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in the Field of Youth
युवा के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in the Field of Youth
युवा के क्षेत्र में समूह कार्य
युवा देश का निर्माता होता है। आज भारत की लगभग आधी आबादी युवा है। युवा शक्ति, ऊर्जा, क्षमता, कुशलता एवं परिश्रम से भरपूर होता है और यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जाए तो यह समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। किंतु वर्तमान समय में युवाओं को भी अनेक समस्याओं जैसे बेरोज़गारी, नशाखोरी एवं अपराध ने जकड़ लिया है, जिससे उनका एवं राष्ट्र का विकास रूका हुआ नज़र आ रहा है।
युवाओं की भागीदारी की ओर यदि नज़र डालें तो राजनैतिक दल से लेकर हर कोई युवाओं के महत्व को स्वीकार कर रहा है एवं विद्यार्थी नेतृत्व को महत्व दे रहे हैं। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विद्यार्थी विंग स्थापित किए गए हैं। ये समूह संगठित प्रयासों के माध्यम से विद्यार्थी समुदाय की सामान्य आवश्यकताओं और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित कर उनका समाधान निकालते हैं। भारत सरकार ने 1988 में निर्मित राष्ट्रीय युवा नीति को वर्ष 2003 में और अधिक व्यापक व सशक्त रूप प्रदान किया है, जिससे युवाओं का सर्वांगीण विकास किया जाए। अनेक संस्थाओं जैसे युवा समाजएन.सी.सी., ग्रामीण युवा क्लबों की स्थापना कराई गई है। कुछ गैर सरकारी युवा और विद्यार्थी संगठनों जैसे एम.सी.ए. वाई, डब्ल्यू.सी.ए., स्काउट्स और गाइड्स इत्यादि का उद्गम हुआ है। नेहरू युवा केंद्र की स्थापना 1972 में हुई। यह छठी पंचवर्षीय योजना का एक भाग था, जिसका भारत में समूह कार्य के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में वर्णन किया जा सकता है।
इस केंद्र के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें सामूहिक भावना को पैदा कर समुदाय आधारित कार्यों को करना एव युवा नेतृत्व का निर्माण करना था जो अत्यंत ही प्रभावी साबित हुआ। 1969 में गैर-सरकारी मंच पर विश्व युवक केंद्र का निर्माण कर युवा संगठन तथा युवा सेवाओं कोविकसित करने की आवश्यकता एवं उनमें जागरूकता लाने के लिए प्रशिक्षण देकर कार्यकर्ता तैयार करने पर बल दिया गया।
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