संस्थागत स्थापनों में व चिकित्सा के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in Institutional Settings and in the Field of Medicine
संस्थागत स्थापनों में व चिकित्सा के क्षेत्र में समूह कार्य - Group Work in Institutional Settings and in the Field of Medicine
संस्थागत स्थापनों में समूह कार्य
संस्थागत स्थापनों में समूह कार्य समाज कार्य दिन-प्रतिदिन अनेक क्षेत्रों में विस्तारित होते जा रहा है। आज समाज का कोई ऐसा भाग नहीं है जहाँ समाज कार्य हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। इसके कार्य को देखते हुए अन्य क्षेत्रों में भी इसकी उपयोगिता महसूस की जा रही है। समाज कार्य में समूह कार्य के माध्यम से यह अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर व्यक्तियों एवं समूहों की समस्या को ज्ञात कर उनके समाधान का प्रयास करता है। विभिन्न क्षेत्रों में समूह कार्य के माध्यम से निम्न में प्रकार के कार्य किए जाते हैं।
चिकित्सा के क्षेत्र में समूह कार्य :-चिकित्सीय समाज कार्य आधुनिक समय में सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य माना जाने लगा है। विभिन्न अस्पतालों के माध्यम से यह कार्य विभिन्न प्रकार की प्रणाली के माध्यम से कार्यकर्ता द्वारा दिया जाने लगा है। मानव समाज एक परिवर्तनशील समाज है। इसमें निरंतर परिवर्तन होता रहता है। बढ़ते औद्योगीकरण, नगरीकरण एवं संयुक्त परिवार के पतन ने दिनोंदिन कई प्रकार की आर्थिक सामाजिक एवं मनोसामाजिक समस्याओं को जन्म दिया है। परिणामस्वरूप इन समस्याओं के निवारण एवं निराकरण हेतु चिकित्सीय समाज कार्य की महत्त्वपूर्ण उपयोगिता को देखा जा रहा है।
प्रोफेसर राजाराम शास्त्री ने चिकित्सीय समाज कार्य को परिभाषित करते हुए कहा था कि चिकित्सीय समाज कार्य का मुख्य उद्देश्य चिकित्सीय सहुलियतों का उपयोग रोगियों के लिए अधिकाधिक फलप्रद एवं सरल बनाने तथा चिकित्सा में बाधक मनोसामाजिक दशाओं का निराकरण करना है। चिकित्सीय समाज कार्य के इतिहास पर यदि नज़र डाली जाए तो इसकी शुरूआत व्यवस्थित रूप से अमेरिका के मैसाचुसेट जनरल अस्पताल में हुई। डॉ. रिचर्ड सी केवट पहले व्यक्ति थे जिन्होंने यह स्वीकार किया कि रोगों का सामाजिक ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसकी सामाजिक स्थिति का प्रभाव रोगी पर पड़ता है। 1920 के दशक में समाज कार्यकर्ताओं की चिकित्सा के क्षेत्र में भर्ती बढ़ती हुई नज़र आई है, जिसके माध्यम से अपाहिज एवं आवश्यकता ग्रस्त व्यक्ति के उपचार हेतु कार्यकर्ताओं को नियुक्त किया गया। भारत में चिकित्सीय समाज कार्य के इतिहास पर यदि नज़र डाली जाए तो 1946 में सर्वप्रथम चिकित्सा समाज कार्यकर्ता की नियुक्ति बंबई के जेजे अस्पताल में हुई। समूह कार्यकर्ता अपनी निपुणताओं से संभावित रोगियों के लिए समूह कार्य तकनीकों का प्रयोग मनोचिकित्सीय प्रकार से करता है एवं उनके परिवारों को भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए मदद करता है।
समूह कार्यकर्ता द्वारा इस प्रकार का प्रयास किया जाता है कि सेवार्थी को किस प्रकार की चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे वह अपने परिवार में सामंजस्य स्थापित कर पाए। समूह कार्य के माध्यम से रोगी और उनके परिवारों के सदस्यों को सहयोगात्मक चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। समूह कार्य दुश्चिंतातनाव एवं एकाकीपन जैसी स्थिति को दूर करने में सहायता करता है। समूह कार्य प्रक्रिया, सहज प्रक्रिया में तथा चिकित्सा प्रक्रिया में उनको भागीदारी के योग्य बनाता हैं। आज के समय में यदि देखा जाए तो राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एन.आर.एच.एम) जैसे सरकारी कार्यक्रमों में सामाजिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति होने लगी है जिसमें बच्चों एवं माताओं के पोषाहार से लेकर उनके संपूर्ण रोगों का अध्ययन किया जा रहा है। वर्तमान में चिकित्सीय समूह कार्य का क्षेत्र अत्यधिक बढ़ता जा रहा है और यह सरकारी एवं निजी अस्पताल देखा जा सकता है।
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